राजस्थान शिक्षा सहयोगी संघ (मां-बाड़ी योजना) की जिला स्तरीय बैठक प्रतापगढ़ के टैगोर पार्क में हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष खेमराज मीणा ने की।बैठक में जिले के सभी उपखंडों से मां-बाड़ी और डे-केयर शिक्षा सहयोगियों ने भाग लिया। 13 फरवरी से तालाबंदी बैठक में आंदोलन की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। शिक्षा सहयोगियों ने बताया कि 13 फरवरी से मां-बाड़ी और डे-केयर केंद्रों पर तालाबंदी और कलमबंदी आंदोलन लगातार जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट सत्र में सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस अनदेखी के कारण प्रदेशभर के लगभग 1 लाख बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। प्रतापगढ़ जिले में संचालित 408 मां-बाड़ी एवं डे-केयर केंद्रों में अध्ययनरत करीब 10,000 बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है। शिक्षा सहयोगियों ने कहा कि लगातार बंद पड़े केंद्रों के कारण बच्चों की शिक्षा, पोषण और नियमित गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ रहा है। वरिष्ठता के आधार पर कैडर निर्धारण की मांग संघ की प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा गया कि मां-बाड़ी शिक्षा सहयोगियों को वर्ष 2022 में शामिल किया जाए। वरिष्ठता के आधार पर कैडर निर्धारण किया जाए। प्रतिभागियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द सुनवाई नहीं करती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। जिला अध्यक्ष खेमराज मीणा ने कहा कि सरकार की अनदेखी से शिक्षा सहयोगियों में निराशा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी जायज़ मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन केवल सेवा शर्तों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार से सकारात्मक बातचीत होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।


