भास्कर न्यूज | लुधियाना पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग ने पुलिस शक्तियों के दुरुपयोग और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के उल्लंघन से जुड़े आरोपों को गंभीर मानते हुए सीपी लुधियाना को नोटिस जारी किया है। आयोग ने यह आदेश डॉ. सुमीत सोफत की शिकायत पर सुनवाई के दौरान जारी किया है। सीपी से मामले की जांच कर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत में थाना डिवीजन नंबर-8 के एसएचओ और पुलिस चौकी घुमार मंडी के इंचार्ज पर बीएनएस की धारा 35(3) के तहत कथित तौर पर अवैध और त्रुटिपूर्ण नोटिस जारी करने के आरोप लगाए गए हैं। डॉ. सोफत का कहना है कि अक्टूबर 2025 में आयकर विभाग की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के तहत उन्हें भेजे नोटिस में एफआईआर की तारीख और परिवार के सदस्यों के पते तक गलत दर्ज थे। आरोप है कि जिन धाराओं में केस दर्ज किया गया, वे गैर-संज्ञेय थीं, इसके बावजूद कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत नोटिस जारी कर दिया गया। शिकायत के मुताबिक नोटिस केवल उनके बुजुर्ग पिता को सौंपा गया, जबकि अन्य नामजद सदस्यों को नियमानुसार नोटिस नहीं दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने उनके 85 वर्षीय माता-पिता और बीमार महिला परिजनों को व्यक्तिगत रूप से पुलिस पोस्ट में पेश होने पर जोर दिया, जो बीएनएस की धारा 179 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस पोस्ट में बुलाए जाने के बाद उनकी मां डॉ. रमा सोफत की हालत बिगड़ गई और उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा। जोकि पुलिस के कथित दबाव का नतीजा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को ईमेल से कई बार वैध नोटिस जारी करने और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करने की मांग की, लेकिन कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। आयोग ने माना कि लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और जिला स्तर पर उच्च अधिकारी से जांच कराना जरूरी है। इसी आधार पर लुधियाना पुलिस कमिश्नर को मामले की विस्तृत जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।


