मालगाड़ी की टक्कर से हाथी के बच्चे की मौत:खलारी में पटरियों पर पहुंचे हाथी, घंटों रूकी रही वंदे भारत जैसी ट्रेने, यात्री रहे परेशान

बरकाकाना-बरवाडीह रेलखंड पर आमिलान-निद्रा के बीच मालगाड़ी की चपेट में आने से एक हाथी का बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी देर रात मौत हो गई। घटना के बाद हाथियों का झुंड आक्रोशित होकर रेल पटरी पर डट गया। चंदवा थाना क्षेत्र के पुतरी टोला गांव के पास हुई इस घटना ने बरकाकाना–बरवाडीह रेलखंड पर रेल परिचालन पूरी तरह ठप कर दिया।
शाम करीब 7:30 बजे से शुरू हुआ यह गतिरोध आधी रात तक बना रहा। वन विभाग की टीम ने मशाल जलाकर हाथियों को हटाने का प्रयास किया, लेकिन वे लंबे समय तक पटरी से नहीं हटे। करीब साढ़े चार घंटे बाद रात 12 बजे के आसपास झुंड को हटाया जा सका, जिसके बाद 12:20 बजे अप लाइन पर परिचालन बहाल हुआ। गरीब रथ, वंदे भारत समेत कई ट्रेनें जहां-तहां खड़ी रहीं पटरी पर हाथियों के जमे रहने से कई महत्वपूर्ण ट्रेनें अलग-अलग स्टेशनों पर फंस गईं। 12877 रांची–गरीब रथ राय स्टेशन पर शाम 7:54 बजे से खड़ी रही, जबकि 21894 टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस टोरी स्टेशन पर 7:48 बजे से रुकी रही। 13347 पलामू एक्सप्रेस खलारी स्टेशन पर 7:35 बजे से ठप रही। 18309 जम्मूतवी एक्सप्रेस बरकाकाना में, 13025 हावड़ा–भोपाल एक्सप्रेस भी बरकाकाना स्टेशन पर और 18635 सासाराम इंटरसिटी हेंदेगीर स्टेशन पर रोकी गई। रांची–बनारस एक्सप्रेस रामगढ़ कैंट में खड़ी रही। ट्रेनों के अचानक रुकने से यात्री घंटों अनिश्चितता में फंसे रहे। यात्रियों की बढ़ी परेशानी, भोजन-पानी का संकट खलारी स्टेशन पर पलामू एक्सप्रेस में सवार यात्रियों को सबसे अधिक दिक्कत झेलनी पड़ी। ट्रेन तीन घंटे से अधिक समय तक खड़ी रही। यात्रियों ने बताया कि एसी कोच में एयर कंडीशनर बंद हो गया था, जिससे घुटन महसूस हो रही थी। पेंट्री कार नहीं होने से खाने-पीने की समस्या भी सामने आई। कई यात्रियों ने स्टेशन के छोटे स्टॉल से बिस्कुट और चिप्स खरीदकर भूख मिटाई। कुछ यात्रियों ने आसपास रहने वाले परिजनों से घर का भोजन मंगवाया। यात्रियों का कहना था कि यदि ट्रेन समय पर चलती तो वे गंतव्य तक पहुंचकर भोजन-पानी की व्यवस्था कर सकते थे। सूचना के अभाव में बढ़ी बेचैनी रेलवे प्रशासन की ओर से स्पष्ट सूचना नहीं मिलने से यात्रियों में असमंजस की स्थिति बनी रही। कई यात्रियों को आगे की कनेक्टिंग ट्रेन पकड़नी थी, जिनके छूटने की आशंका बढ़ गई। आधी रात के बाद जब हाथियों को पटरी से हटाया गया, तब जाकर रेल यातायात सामान्य हो सका।
इनपुट – अरुण चौरसिया, खलारी

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