राजधानी के मास्टर प्लान 2031 में मिली गड़बड़ियों को दो साल बाद भी नहीं सुधारा जा सका है। नए मास्टर प्लान में शहर के लिए करीब एक दर्जन नई एमआर सड़कें प्रस्तावित हैं। लेकिन प्लान के पूरी तरह से लागू नहीं होने की वजह से इन नई सड़कों का काम भी आज तक शुरू नहीं हो पाया है। इन सड़कों के लिए कभी कोई फाइल भी नहीं चल पायी है। नई एमआर सड़कें बनती तो शहर के लाखों लोगों को कई तरह की सुविधा मिलती। शहर का ट्रैफिक व्यवस्थित होता और जाम की समस्या भी खत्म होती। लेकिन अफसरों की लापरवाही की वजह से एक भी सड़क का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। मास्टर प्लान में कई बड़ी गड़बड़ियां और फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बावजूद अभी तक इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है। प्लान बनाने वाले एक भी अफसर का आज तक न तो बयान लिया गया है और न ही उन्हें दोषी ठहराया गया है। मास्टर प्लान बनाने वाली सभी अफसर अभी भी टाउन प्लानिंग समेत दूसरे विभागों में काम कर रहे हैं। शहर में कई जरूरी काम चलते रहे इसके लिए राज्य सरकार ने टाउन प्लानिंग विभाग को कुछ जरूरी निर्देशों के साथ काम करने की अनुमति दी है। इस वजह से कई जगहों पर इसी प्लान से काम हो रहा है। लेकिन एमआर सड़कों में बड़ा एरिया प्रभावित हो रहा है इसलिए इसकी अनुमति नहीं दी जा रही है। मास्टर प्लान 2031 में एमआर की प्रस्तावित सड़कें 1. एमआर-1: रायपुर धमतरी छोटी रेल लाइन को स्थानांतरित कर उसकी जगह एमआर क्रमांक1 विकास योजना 2011 में प्रस्तावित किया गया था। इसी सड़क को फिर प्लान में शामिल किया गया है। यह सड़क गुढ़ियारी अंडरपास से शुरू होकर बिलासपुर मार्ग, बलौदाबाजार मुख्य मार्ग क्रमांक 3 एवं रिंग रोड क्रमांक 4 होते हुए निवेश क्षेत्र की सीमा तक बनेगी। इसकी चौड़ाई 50 मीटर होगी।
2. एमआर-2: यह सड़क रायपुर वाल्टेयर रेलवे लाइन के दक्षिण की ओर रेलवे लाइन के समानांतर एमआर क्रमांक 4 एवं जोरा होते हुए निवेश क्षेत्र सीमा तक प्रस्तावित की गई है। इसकी चौड़ाई 30 से 50 मीटर होगी।
3. एमआर-3: एमआर 2 से निकलकर वर्तमान शंकरनगर मार्ग रेखांकन के अनुरूप सिविल लाइन होते हुए पुलिस लाइन एवं बूढ़ा तालाब मार्ग से होकर लाखे नगर चौक तक। इसकी चौड़ाई 30 मीटर होगी।
4. एमआर-4: वर्तमान सदर बाजार रोड से आजाद चौक से शुरू होकर कटोरा तालाब होते हुए रिंग रोड 1 अशोका मिलेनियम के पास तक। इस सड़क की चौड़ाई 18 से 30 मीटर की जानी है।
5. एमआर-5: पैराडाइज होटल के पास से शुरू होकर पश्चिम में बाइपास रेल मार्ग पर एमआर 18 से मिलाई जाएगी। इसके बाद गोंदवारा सड़क को आरआर क्रमांक 2 को पार करते हुए एमआर 17(ब) तक। इस सड़क की चौड़ाई 18 मीटर, 2 मीटर और 30 मीटर होगी।
6. एमआर-6: जीई रोड पर आमापारा चौक के पास से शुरू होकर उत्तर की ओर वर्तमान सड़क से तेलघानीनाका रेलवे ओवरब्रिज होते हुए एमआर 18 को पार कर रिंग रोड 2 को जोड़ते हुए एमआर 5 में मिलेगी। इस सड़क को 24 से 30 मीटर चौड़ा किया जाएगा।
7. एमआर-7: रेलवे स्टेशन से शुरू होकर जेल रोड, फाफाडीह चौक होते हुए शास्त्री चौक पर मिलेगी। सड़क की चौड़ाई 30 मीटर, 25 मीटर, 30 मीटर की जाएगी।
8. एमआर-8: शारदा चौक से गुरुनानक चौक होते हुए स्टेशन रोड से होते हुए रेलवे स्टेशन तक जोड़ी जाएगी। इस सड़क की चौड़ाई 20 मीटर की जाएगी।
9. एमआर-9: चूना भट्टी के पास वर्तमान रेलवे गुढ़ियारी अंडरपास से शुरू होकर उत्तर की ओर एमआर क्रमांक 5 को जोड़ते हुए बिलासपुर मार्ग में मिलेगी। सड़क की चौड़ाई 20 मीटर होगी।
10. एमआर-10: बिलासपुर रोड से शुरू होकर उत्तर की ओर एमआर 2 को पार कर खाद्य निगम गोदाम के आगे मोवा होते हुए एमआर 10 (अ) में मिलेगी। इस सड़क की चौड़ाई 24 से 30 मीटर की जानी है।
11. एमआर-10 (ए): एमआर 32 से शुरू होकर पूर्व की ओर मुख्य मार्ग 33 से मिलेगी। सड़क की चौड़ाई 30 मीटर होगी।
12. एमआर-10 (बी): एमआर 10 से शुरू होकर दक्षिण दिशा में एमआर 33 से पूर्व की ओर। सड़क की चौड़ाई 30 मीटर की जानी है।
सौ से ज्यादा गड़बड़ियों को अभी ठीक करना है
पिछली कांग्रेस सरकार में जब मास्टर प्लान लागू किया जा रहा था तब डेढ़ हजार से ज्यादा आपत्तियां दर्ज की गई थी। अफसरों ने बिना कोई ठोस कारण बताए सभी आपत्तियों का निराकरण का दावा कर दिया। यही वजह है कि जो जरूरी संशोधन पहले होने थे वे अब तक नहीं हुए। बाद में भाजपा सरकार के आने के बाद इन आपत्तियों का परीक्षण कराया गया तो कई सारी खामियां सामने आई। इसके बाद ही मास्टर प्लान की जांच और जरूरी संशोधन के आदेश जारी किए गए। पुराने मास्टर प्लान में सौ से ज्यादा गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं। जिन्हें ठीक करना है। लेकिन अभी तक इन गड़बड़ियों पर कोई भी ठोस फैसला नहीं हो पाया है। ये फायदा होगा नई एमआर सड़कों के बनने से ट्रैफिक दबाव कम होता, जाम की समस्या घटती और यात्रा समय में कमी आती। प्रमुख मार्गों के जुड़ने से नए इलाकों का विकास तेज होता, जमीन का बेहतर उपयोग होता और व्यापारिक गतिविधियां बढ़तीं। सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात सुविधा मिलती है।


