त्याग, सेवा और समर्पण की प्रतिमूर्ति संत शिरोमणि स्वामी हिरदाराम साहिबजी के 18वें महाप्रयाण दिवस पर मिठी गोबिंदराम पब्लिक स्कूल में आज विशेष तौर पर आयोजित प्रार्थना सभा में उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।कार्यक्रम के आरंभ में संत जी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा रामधुन का समवेत गान किया गया। इस अवसर पर अपने संप्रेषित संदेश में संस्था सचिव घनश्याम बूलचंदानी ने कहा कि पुष्कर राज ब्रह्मलीन संत ऐसी जीवात्मा रहे, जिन्होंने अत्यंत कम संसाधनों का उपयोग कर अपना जीवन पूर्ण सादगी से जीया। उनका जीवन साधारण जीवनयापन से असाधारण सामाजिक एवं सार्वजनिक हित के कार्यों की विलक्षण गाथा के समान है। विद्यालय प्राचार्य अजय बहादुर सिंह ने इस अवसर पर छात्रों को संत जी के कार्यों से अवगत कराते हुए कहा कि संत जी ने मानव हित के अपने किसी भी प्रयास का कभी यशगान नहीं किया। आज उनके परम शिष्य सिद्ध भाऊ द्वारा स्थापित मानव हित के कार्यों की श्रृंखला को निरंतरता प्रदान कर रहे हैं। संतजी का कथन है – “बूढ़े, बच्चे और बीमार, हैं परमेश्वर के यार, करें भावना से इनकी सेवा, पाएंगे लोक परलोक में सुख अपार”
संत जी ने हृदय के अंतस भावों से बच्चों एवं वृद्धों की सेवा करने को कहा। न सिर्फ कहा वरन् अपने अथक प्रयासों से विभिन्न सेवा संस्थाएँ स्थापित कर इस कथन की सत्यता का प्रमाण दिया। इस अवसर पर संस्था के अकादमिक निदेशक गोपाल गिरधानी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि संत जी की दिव्यता को उनके सद्कार्यों के माध्यम से सदा स्मरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत जी ने समाज की वास्तविक उन्नति हेतु शिक्षा को अनिवार्य तत्व माना तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना की, जिनके माध्यम से आज युवा पीढ़ी उत्तम शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक जय रिझवानी, शिक्षिकाएं सोनी ग्वालानी, विशिका पंजवानी, मोहिनी सीरवानी, सपना लच्छवानी व कोमल रामचंदानी ने संत जी का चालीसा मातृभाषा सिंधी में प्रस्तुत कर उनकी महिमा का गान किया । कक्षा दूसरी के विद्यार्थियों रियांश जैन, रिदम ताम्रकर, प्रतीक मालवीय, कुँज पाटीदार, एवं तक्ष थानी ने रामायण में से गुरू आधारित चौपाइयों का गान किया। कार्यक्रम में उप प्राचार्य दीपा एंथोनी, समस्त कॉर्डिनेटर, शिक्षक एवं छात्र सम्मिलित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन अंजू गोगिया द्वारा किया गया।


