भास्कर न्यूज | बगोदर देशव्यापी प्रतिवाद दिवस के आह्वान पर शुक्रवार को बगोदर प्रखंड के मुंडरो गांव में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन विश्वविद्यालय एवं कॉलेज परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने और उसे दंडनीय बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए यूजीसी के मसौदा नियम पर रोक लगाए जाने के विरोध में आयोजित किया गया। विरोध सभा को संबोधित करते हुए आइसा की झारखंड प्रदेश अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की बहाली की दिशा में यूजीसी का यह प्रस्तावित नियम एक महत्वपूर्ण पहल थी। उनके अनुसार, यह नियम वंचित वर्ग के छात्रों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ संस्थानों में समावेशी वातावरण को बढ़ावा देने में सहायक होता। विभा पुष्पा दीप ने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी और सामंती मानसिकता से प्रेरित ताकतों के दबाव में आकर सरकार ने इस पर रोक लगा दी, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्र नेताओं ने इसे सामाजिक न्याय की प्रक्रिया को बाधित करने की साजिश बताया। अन्य वक्ताओं ने कहा कि आज भी देश के कई उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित, आदिवासी और वंचित समुदायों से आने वाले छात्रों को मानसिक प्रताड़ना एवं संस्थागत भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे माहौल में छात्रों की प्रतिभा प्रभावित होती है और वे असुरक्षित महसूस करते हैं। यूजीसी का यह नियम उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम था। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने मांग की कि यूजीसी अपने निर्णय को तत्काल वापस ले और कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए सख्त, पारदर्शी और प्रभावी नियम लागू करे। छात्र प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि जब तक देश के हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में समान, सुरक्षित और गरिमापूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से आइसा की उर्मिला कुमारी, आरती महतो, खुशबू कुमारी, नेहा कुमारी, मोनिका कुमारी, सीमा कुमारी, संगीता कुमारी, अंजली कुमारी, अंकित कुमार, पिंटू कुमार महतो, निर्मल कुमार महतो, राजू कुमार महतो, छोटी कुमार महतो समेत दर्जनों छात्र-युवा उपस्थित थे।


