नगरीय विकास एवं आवास का उपक्रम एमपी अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (एमपीयूडीसी) अब नमामि गंगे की तर्ज पर नमामि नर्मदे योजना पर काम करेगा। अब उपक्रम में एक स्वतंत्र सेक्शन बनाकर नर्मदा नदी के तट की शहरी बसाहटों के ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय सुधार और ट्रीटमेंट के बाद उपलब्ध जल के दोबारा उपयोग के लिए प्रोजेक्ट बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई एमपीयूडीसी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में मंगलवार को ये निर्णय हुआ। उपक्रम अब तक जलापूर्ति और सीवरेज प्रोजेक्ट पर काम करता रहा है। अब ‘नमामि नर्मदे’ के अलावा ईवी-अर्बन मोबिलिटी (परिवहन), आईटी और निजी सार्वजनिक भागेदारी (पीपीपी) जैसे सेक्टर में काम होगा। इसके लिए सब्जेक्ट एक्सपर्ट नियुक्त किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नए सेक्शनों का उद्देश्य शहरों में निवेश बढ़ाना, नागरिक सुविधाओं को बेहतर करना और परिवहन के आधुनिक साधन उपलब्ध कराना है। बैठक में एसीएस डॉ. राजेश राजौरा, दीपाली रस्तोगी, पीएस सुखबीर सिंह, पी. नरहरि, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं आवास संकेत भोंडवे मौजूद थे। इन नए विभागों का उद्देश्य वित्तीय अनुशासन, नीति आयोग और अन्य विभागों से समन्वय के साथ मेट्रोपोलिटन एरिया डेवलपमेंट के कामों को तेजी से आगे बढ़ाना है। अब जरूरतों के हिसाब से बदलेगा कंपनी का काम
एसीएस नगरीय प्रशासन संजय दुबे ने कहा कि वर्तमान समय की जरूरतों के हिसाब से अब कंपनी की संरचना बदली जाएंगी। जरूरत के मुताबिक पद स्वीकृत हैं, अब उसके मुताबिक सब्जेक्ट एक्सपर्ट ढूंढ़कर उनको इन नए सेक्शन में रखा जाएगा। शहरी परिवहन, आईटी इनेबल्ड सुविधाओं की जरूरत और नए शहरी विकास में नए सुझावों के लिए ये सेक्शन काम करेंगे।


