पिछले तीन सालों में राजस्थान में ड्रग्स तस्करी के मामले 30 प्रतिशत बढ़ गए हैं। ड्रग्स तस्करों के खिलाफ प्रदेश भर में 17 हजार से ज्यादा कार्रवाई के बावजूद तस्करी बढ़ क्यों रही है? इससे सरकार नाराज है और छूट रहे गैप को खत्म कर और सख्ती के मूड में है। मंगलवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गृह विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक सीएम हाउस में बुलाई। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि बढ़ती तस्करी में गैर जिम्मेदारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नशे के सप्लाई चेन को पहचान कर इसे ध्वस्त करना होगा। छोटे से लेकर बड़े नेटवर्क को खत्म करने के लिए पुलिस, ड्रग्स कंट्रोलर, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियां साथ मिलकर एक्शन लें। ड्रग्स तस्करी में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ प्रभावी कानूनी पैरवी भी हो, ताकि तस्कर जेल से बाहर न आ सके। भास्कर सुझाव; सख्ती सिस्टम से शुरू हो, थानेदार जिम्मेदार हो, मुखबिर बढ़ाएं और इन्सेंटिव दें, जनता का साथ लें पुलिस : गैर जिम्मेदारी पर सस्पेंड व बर्खास्त, अच्छों को प्रमोशन दे जनता: चुप्पी तोड़े, शासन की ओर से सुरक्षा-समर्थन मिले जो अच्छा किया एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 91 तस्करों को पकड़ा, 30 ऐसे तस्कर, जिन पर 7.65 लाख रुपए इनाम था। 120 नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं। 10 जिलों में 25-25 बेड वाले केंद्र खोल रहे। 1.12 करोड़ लोगों ने नशा छोड़ दिया। जो कसर रही ड्रग्स तस्करी लगातार बढ़ रही है। 2023 में 4872 कार्रवाई हुई थीं। 2024 में 5246 और 2025 में आंकड़ा बढ़कर 6256 तक पहुंच गया। स्कूल-कॉलेजों के बाहर ही नहीं बल्कि, अंदर तक नशा पहुंच रहा है। एमडी ड्रग भी बढ़ती जा रही है। नशे के खिलाफ लड़ाई में प्रभावशाली नतीजे पाने वाले राज्यों का मॉडल भी देखा जा सकता है


