मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार को दुर्ग में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। पीडब्ल्यूडी सभा कक्ष में सुबह 11 बजे से शुरू हुई इस बैठक में ग्रामीण एवं पिछड़ा वर्ग क्षेत्रों के समग्र विकास पर चर्चा की गई और कई अहम निर्णय लिए गए। इस उच्चस्तरीय बैठक में मंत्रिमंडल के सभी सदस्य, सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, विभागीय सचिव और प्रदेशभर के कलेक्टर शामिल हुए। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्राधिकरण के बजट की जानकारी प्रस्तुत की गई, साथ ही स्वीकृत विकास कार्यों के अनुमोदन की प्रक्रिया भी पूरी की गई। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1006 विकास कार्यों के लिए लगभग 72.20 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति पहले ही जारी की जा चुकी थी, जिसे अब प्राधिकरण की मंजूरी मिल गई है। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 79.56 करोड़ रुपए के कार्यों के अनुमोदन पर भी चर्चा की गई। पिछले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत 1220 विकास कार्यों में से 709 कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 508 कार्य अभी भी अधूरे हैं। बैठक में इन लंबित परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को शेष कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए, साथ ही भविष्य की परियोजनाओं को गति देने की रणनीति भी तय की गई। पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण की भूमिका पर जोर बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई और सदस्यों से कई महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह प्राधिकरण केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग के विशेष विकास के लिए गठित किया गया है, ताकि संसाधनों की कोई कमी न रहे। वर्तमान में प्राधिकरण का बजट करीब 80 करोड़ रुपये है। 35 विधानसभा और 19 जिलों को मिल रहा लाभ मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के अंतर्गत राज्य के करीब 35 विधानसभा क्षेत्र और 18 से 19 जिले आते हैं। पूरे प्रदेश में इस तरह के कुल पांच विकास प्राधिकरण कार्यरत हैं, जो क्षेत्रीय संतुलन के साथ विकास को सुनिश्चित कर रहे हैं। धान खरीदी पर भी दिया जवाब धान खरीदी को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अधिकांश किसानों से खरीदी पूरी हो चुकी थी। सत्यापन या टोकन संबंधी कारणों से जिन किसानों की धान नहीं बिक पाई थी, उनके लिए दो दिनों की अतिरिक्त खरीदी अवधि दी गई, ताकि किसी भी किसान को नुकसान न हो। आईटी पार्क के लिए 40 कंपनियों से एमओयू इसी दिन दुर्ग में आईटी पार्क को लेकर एक और बड़ी पहल सामने आई। नालंदा परिसर स्थित आईआईटी भिलाई में आयोजित कार्यक्रम में 40 आईटी कंपनियों ने आईटी पार्क में सेंटर स्थापित करने को लेकर सहमति जताई। इस अवसर पर 20 कंपनियों ने औपचारिक रूप से एमओयू पर हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रहे। निवेशकों को मिली राहत कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के हाथों यश ड्रीम के निवेशकों को उनकी डूबी हुई राशि लौटाई गई। सांकेतिक रूप से 6 निवेशकों को 20 लाख 32 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। शेष निवेशकों के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई।


