मुरादाबाद में 2.74 लाख रुपए की जाली करेंसी के साथ पकड़े गए आदिल ने सिलसिलेवार दैनिक भास्कर को बताया कि वो कैसे नकली नोट छापता था और उसे असली जैसा नोट बनाने में कितना वक्त लगा ? आदिल ने बताया कि वो करीब 3 साल से नकली नोटों के धंधे में लगा था। उसने नकली नोट छापने के लिए प्रिंटर का इस्तेमाल किया और सबसे पहली कोशिश उसने A4 पेपर पर की। लेकिन धीरे-धीरे वो पेपर बदलता गया और ड्राइंग पेपर पर जाकर उसकी सर्च पूरी हुई। करीब 2 महीने की प्रैक्टिस के बाद वो हूबहू असली जैसा नोट प्रिंट करने में कामयाब रहा। आदिल ने बताया कि उसने नोट में मौजूद होने वाली चमकीली स्ट्रिप के स्थान पर चमकीले टेप का प्रयोग किया। नोट छापने के लिए अपनी गर्लफ्रेंड के घर को ठिकाना बनाया। आदिल का घर से करीब 500 मीटर दूर रहने वाली एक विधवा नर्स के साथ अफेयर था। नकली नोट छापने का काम आदिल इसी के घर से करता था। आदिल ने बताया कि वो रोजाना नोट छापता था और रोज उन्हें बाजार में चला देता था। उसने मझोला के जयंतीपुर इलाके में अपनी गर्लफ्रेंड के घर को जाली करेंसी के काम के लिए अपना हेडक्वार्टर बना रखा था। हालांकि उसने पुलिस पूछताछ में दावा किया है कि उसकी नर्स गर्लफ्रेंड को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। उसके अस्पताल जाने के बाद वो नकली नोट छापता था। मूवी देखकर प्रिंटर से छापने शुरू किए नकली नोट SP सिटी रणविजय सिंह ने बताया- मझोला पुलिस ने जयंतीपुर में एक घर से जाली करेंसी छापते हुए आदिल निवासी टंकी के पास जयंतीपुर को रंगेहाथ दबोच लिया। उसके दो साथी मोहम्मद नाजिम निवासी एचएस स्कूल के पास राजा का सहसपुर बिलारी और शबाब अख्तर उर्फ राहुल निवासी काले बाबा का मैदान के पास नई आबादी जयंतीपुर को भी पकड़ा है। आदिल ने शाहिद कपूर की मूवी ‘फर्जी’ देखकर प्रिंटर की मदद से जाली करेंसी छापने के आइडिया पर काम शुरू किया। कई बार फेल होने के बाद वो आखिरकार इसमें कामयाब हुआ और हूबहू नोट छापने लगा। पुलिस पूछताछ में आदिल ने बताया कि वो अभी तक करीब 3 लाख रुपए के नकली नोट बाजार में खपा चुका है। वो खुद नोट छापता था। उसके बाकी दोनों साथी नाजिम और शबाब अख्तर उर्फ राहुल नकली नोटों को गांव देहात के बाजारों में खपाने का काम करते थे। मीडिया में घुल मिल गया था आदिल, फोटोग्राफी करता था SP सिटी ने बताया- आदिल बेहद शातिर अपराधी है। अपने कारनामों पर पर्दा डालने के लिए उसने मीडिया जॉइन कर ली। पिछले दो सालों में वो प्रेस फोटोग्राफर की तरह काम करने लगा था। कुछ मीडिया वालों काे फोटो उपलब्ध कराकर उनका साथ पकड़ लिया था। उसकी स्ट्रैटजी ये थी कि या तो वो अपने अड्डे पर जाली करेंसी छापता था या फिर बाकी वक्त में मीडिया के बीच घुला-मिला रहता था। यहां तक कि उसने इस बीच परोक्ष रूप से कुछ अखबारों के लिए भी काम करना शुरू कर दिया था। वो मीडिया में मुख्य धारा में शामिल होने की कोशिशों में जुटा था। यही वजह रही कि जब आदिल पकड़ा गया तो उसे छुड़ाने के लिए कुछ मीडिया वाले पैरवी में भी उतरे।


