मुर्गी पालन से प्रति माह कमा रहे 20 लाख रुपए:100 मुर्गियों से शुरू की थी पोल्ट्री फॉर्म, आज 250 लोगों को दी जॉब

झारखंड और बंगाल के पोल्ट्री फॉर्म से जुड़े कारोबारियों के लिए धनबाद के बीरबल मंडल का नाम कोई नया नहीं है। बीरबल अपनी चाहत और अथक प्रयास के बूते आज पोल्ट्री फॉर्म कारोबार में एक बड़ा नाम बन चुके हैं। कभी 100 मुर्गियों से शुरू इनका पोल्ट्री व्यवसाय आज 30 हजार बॉयलर मुर्गियों के पालन तक जा पहुंचा है। इनसे हर माह ये 20-25 लाख रुपए की आमदनी कमा रहे हैं। वहीं, 250 लोगों को पोल्ट्री फॉर्म में जॉब भी दे रखी है। बीरबल मंडल का धनबाद के कतरास राजगंज, तोपचांची में 15 पोल्ट्री फॉर्म संचालित है। वो झारखंड में 70% अंडे की सप्लाई कर रहे हैं। अपने यहां कार्यरत सभी मजदूरों को प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपए वेतन देते हैं। इस कारोबार में अच्छे रोजगार की संभावना बीरबल मंडल बताते हैं कि उन्होंने 1996 में 100 मुर्गियों से इस पोल्ट्री व्यवसाय की शुरुआत की थी। छोटे स्केल पर घर से इसकी शुरुआत हुई। देखा इस कारोबार में अच्छे रोजगार की संभावना है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर कई लोगों के पोल्ट्री फार्म भी खुलवाए। इसके बाद उन्हें ही फीड और चिक्स सप्लाई करने लगा। इससे लोग तो लाभान्वित हुए ही, मुझे भी काफी फायदा हुआ। हेचरी में अंडा डालकर खुद निकालने लगे चिक्स बीरबल ने बताया कि मैंने 2001 में हेचरी की फैक्ट्री लगाई। इसमें अंडा हैदराबाद से मंगवाकर चिक्स का उत्पादन करना शुरू किया। इसकी सप्लाई मार्केट में करने लगे। यह कारोबार भी काफी अच्छा चला, लेकिन 10 साल के बाद इस धंधे में कमाई कम होने लगी। काफी कंपटीशन बढ़ गया था। सभी लेयर फॉर्म काफी अच्छा उत्पादन कर रहे उन्होंने कहा कि 2011 में लेयर फार्म खरीदा। लेयर फार्म में मुझे अच्छी कमाई नजर आई। इसके बाद चार-पांच लेयर फॉर्म लगाया। झारखंड में पहला लेयर फॉर्म मेरे द्वारा बनाया गया। यहां डेढ़ से दो लाख फिलहाल अंडे का उत्पादन होता है। झारखंड के तीन-चार जिलों में लेयर फॉर्म बना है। सभी लेयर फॉर्म काफी अच्छा उत्पादन कर रहे हैं। दो बायो गैस प्लांट का निर्माण कर रहे बीरबल मंडल ने बताया कि हेचरी से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ जिसे लीटर कहते हैं, खुले में फेंकने पर यह काफी बदबू करता है। इससे आस पास के लोग परेशान हो जाते हैं। इस समस्या का हमने निदान निकाला है। हम दो बायो गैस प्लांट का निर्माण कर रहे हैं। इसमें ही लीटर को खपाया जाएगा। इसके दो फायदे होंगे। पहला तो बदबू की समस्या से निजात मिलेगी, दूसरा प्लांट के लिए खुद से बिजली तैयार करेंगे। सरकार इसके लिए सब्सिडी भी दे रही है।

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