मूक-बधिर QR कोड से थाने में कर सकेंगे शिकायत:सीधी भारत का पहला जिला; हर थाने में साइन लैंग्वेज से होगी सुनवाई

मूक-बधिर नागरिकों को न्याय दिलाने की दिशा में सीधी जिले ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीधी अब भारत का पहला जिला बन गया है, जहां सभी थानों और पुलिस चौकियों में साइन लैंग्वेज आधारित QR कोड सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। यह पहल बेंगलुरु स्थित एक साइन लैंग्वेज कंपनी की ओर से विकसित की गई है, जो देशभर में मूक-बधिरों के लिए संचार और अनुवाद के क्षेत्र में कार्यरत है। मूक-बधिरों की आवाज बनेगा क्यूआर कोड सिस्टम यह बेंगलुरु की कंपनी विशेष रूप से मूक-बधिर और श्रवण बाधित व्यक्तियों की साइन लैंग्वेज को सामान्य भाषा में बदलने का कार्य करती है। कंपनी ने एक अत्याधुनिक डिजिटल QR कोड सिस्टम और कॉल सेंटर मॉडल विकसित किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मूक-बधिर व्यक्ति बिना किसी दुभाषिए के सीधे अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा सकें। QR स्कैन करते ही वीडियो कॉल से शिकायत दर्ज होगी जब कोई मूक-बधिर व्यक्ति सीधी जिले के किसी भी थाने में लगे QR कोड को स्कैन करेगा, तो वह सीधे बेंगलुरु स्थित कंपनी के कॉल सेंटर से वीडियो कॉल के जरिए जुड़ जाएगा। कॉल सेंटर में मौजूद प्रशिक्षित वालंटियर उसकी साइन लैंग्वेज को तुरंत समझेंगे और उसे सामान्य भाषा में अनुवाद कर संबंधित थाना प्रभारी या पुलिस स्टाफ को बताएंगे कि व्यक्ति क्या कहना चाहता है और उसकी शिकायत क्या है। इस तकनीक को मध्य प्रदेश में लागू करने के लिए कंपनी और मध्य प्रदेश शासन के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत, कंपनी न केवल तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है, बल्कि कॉल सेंटर में प्रशिक्षित वालंटियर, सॉफ्टवेयर सपोर्ट और साइन लैंग्वेज अनुवाद की पूरी जिम्मेदारी भी निभा रही है। देखिए 2 तस्वीरें… सीधी देश का पहला जिला, जहां हर थाने में सुविधा लागू इस अभिनव पहल के तहत, आनंद सर्विस सोसायटी मूक-बधिर संस्था, इंदौर के सचिव ज्ञानेंद्र पुरोहित के नेतृत्व में सीधी पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी, सभी एसडीओपी, तथा विभिन्न थानों और चौकियों के प्रभारी शामिल रहे। ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि देश में पहली बार ऐसा हो रहा है जब पूरे जिले के सभी थानों में एक साथ मूक-बधिरों के लिए यह सुविधा लागू की जा रही है। इससे पहले योजनाएं बनीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कभी अमल नहीं हुआ।

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