मूलभूत सुविधाओं की मांग पर धमतरी में विरोध:8 गांव के लोगों ने किया 3 घंटे तक चक्काजाम, भारत माता प्रोजेक्ट रूट पर वाहन रुके

छत्तीसगढ़ के धमतरी में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर आठ गांवों के ग्रामीणों ने शनिवार को चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों ने सुबह से ही सड़क पर चटाई बिछाकर प्रदर्शन शुरू किया। इस चक्काजाम की वजह से भारत माता प्रोजेक्ट रूट पर जा रहे वाहनों की लंबी कतार लग गई। करीब तीन घंटे तक यातायात बाधित रहा। ग्रामीणों ने 89 मांगों को लेकर यह मोर्चा खोला है। इस दौरान बोराई, घुटकल, लिखमा, मैनपुर सहित आठ गांवों के करीब 7500 लोग सड़क पर उतरे। उनका कहना है कि उन्हें सड़कों, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहला आंदोलन नहीं है। इससे पहले भी कई बार उनकी मांगों को लेकर प्रदर्शन हो चुका है, लेकिन अब तक किसी ठोस समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। तहसीलदार आश्वासन के बाद चक्काजाम को स्थगित किया। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं: 1. सिहावा से बोराई उडोसा सीमा मार्ग तक डामरी करण किया जाय। 2. सिविल हॉस्पीटल बाराई में सम्पूर्ण स्टॉफ निवास भवन । 3. बोराई से बेलरगॉव तहसील कार्यालय जाने के लिए रोड एवं पुलिया निर्माण किया जाय। 4. बिजली एवं पानी की समस्या का समाधान किया जाय। 5. बोराई पंचायत के आश्रित ग्राम बुडा जाने के लिए रोड एवं पुलिया का निर्माण किया जाय। 6. लिखमा पंचायत के आश्रित ग्राम एकावरी रोड कि मुरमीकरण किया जाय। 7. पोस्टमेटोक आदीवासी बालक छात्रावास भवन की निर्माण किया जाय। 8. शासकीय हायर सेकन्डो स्कूल घुटकेल में फूल प्राचार्य पदस्थ किया जाय। 9. क्षेत्र के सभी स्कूलों में स्वीकृत्त पद के आधार पर शिक्षक पदस्थ किया जाय। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई सालों से इन समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। उनका आरोप है कि आजादी के बाद से ही इस क्षेत्र को बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। स्थानीय प्रशासन ने हालात को समझते हुए बेलरगांव तहसीलदार के माध्यम से ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद चक्काजाम समाप्त कर दिया गया। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों को जल्द नहीं पूरा किया गया तो वे बड़े पैमाने पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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