मूवी में 28 मिनट एड दिखाए, कोर्ट ने दिया नोटिस:सिनेपोलिस फन सिनेमा मैनेजर व सीईओ को किया जवाब-तलब; उपभोक्ता ने टिकट के पैसे-मुआवजा मांगा

कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने सिटी मॉल स्थित सिनेपोलिस फन सिनेमा का संचालन करने वाली सिनेपोलिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Cinepolis India Pvt. Ltd.) के मैनेजर और सीईओ को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मूवी शो टाइम के बाद विज्ञापन दिखाने और फिल्म के आधिकारिक रन-टाइम में कथित विरोधाभास के मामले में जवाब-तलब किया है। दरअसल, एडवोकेट सुजीत स्वामी ने कंज्यूमर कोर्ट में सिनेपोलिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ परिवाद पेश किया था। जिसमें सेवा में कमी, अनुचित व्यापार व्यवहार और भ्रामक प्रजेंटेशन के गंभीर आरोप लगाए गए। सुजीत स्वामी ने परिवाद में टिकट के 230 रुपए वापस देने, सेवा में कमी से हुई मानसिक, पेशेवर एवं आर्थिक क्षति के लिए 20 हजार रुपए हर्जाना और भ्रामक प्रस्तुतीकरण एवं वाद-व्यय सहित 1 लाख मुआवजा देने की मांग की गई है। मामले में अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी। आधिकारिक रन-टाइम 3 घंटे 34 मिनट परिवादी एडवोकेट सुजीत स्वामी ने बताया कि 11 दिसंबर 2025 को फिल्म धुरंधर (हिंदी) का टिकट खरीदा। टिकट एवं काउंटर पर प्रदर्शित सूचना के अनुसार शो-टाइम 2:00 PM, इंटरवल 4:13 PM और शो समाप्ति 5:48 PM दर्शाया गया था। वहीं Central Board of Film Certification (CBFC) द्वारा जारी सेंसर प्रमाणपत्र के अनुसार फिल्म का आधिकारिक रन-टाइम 3 घंटे 34 मिनट है। करीब 28 मिनट तक विज्ञापन दिखाए परिवाद के अनुसार, टिकट पर दर्शाए गए दोपहर 2 बजे के शो-टाइम के बाद लगभग 13 मिनट तक ट्रेलर्स, व्यावसायिक विज्ञापन और पब्लिक सर्विस एनाउंसमेंट्स दिखाए गए, जिससे फिल्म वास्तविक रूप से दोपहर 2.13 बजे शुरू हुई। इंटरेवल के दौरान भी 4.13 से 4.28 बजे तक सिर्फ विज्ञापन ही दिखाए गए। इस तरह करीब 28 मिनट तक विज्ञापन दिखाए गए। परिवादी का कहना है कि उन्होंने टिकट फिल्म देखने के लिए खरीदा था, न कि अनिवार्य रूप से विज्ञापन देखने के लिए। शो-टाइम पर फिल्म शुरू नहीं की गई। अतिरिक्त विज्ञापन दिखाना उपभोक्ता के साथ अन्याय है। 14 मिनट की मूवी कम दिखाई गई सुजीत स्वामी ने परिवाद में बताया कि धुरंधर मूवी का घोषित शो-समय दोपहर 2 से शाम 5.48 बजे तक कुल 3 घंटे 48 मिनट बनता है, जबकि CBFC प्रमाणित अवधि 3 घंटे 34 मिनट है। लेकिन वास्तविक प्रदर्शन के दौरान 28 मिनट विज्ञापन दिखाए गए, जिससे साफ होता है कि कुल रन-टाइम की प्रस्तुति भ्रामक रही और उपभोक्ता को गुमराह किया गया। मामले में परिवादी ने 16 दिसंबर को सिनेमा प्रबंधन को विधिक नोटिस भेजा था। जवाब में प्रबंधन ने विज्ञापनों को उचित ठहराया। लेकिन यह नहीं बताया कि 14 मिनट की मूवी कम दिखाई गई। मूवी कहां काटी गई, इसको जस्टिफाई नहीं किया गया। इसके बाद 23 दिसंबर को जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया गया। आयोग ने सुनवाई करते हुए सिनेपोलिस को नोटिस जारी कर 30 मार्च तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। निर्बाध सिनेमाई अनुभव दर्शकों का संवैधानिक अधिकार सुजीत स्वामी का कहना है कि घोषित शो-टाइम में मनमाना परिवर्तन कर विज्ञापन थोपना दर्शकों के निर्बाध सिनेमाई अनुभव के अधिकार का उल्लंघन है। फिल्म एक अभिव्यक्ति का माध्यम है, उसे बिना अनावश्यक हस्तक्षेप के देखने का अधिकार संरक्षित है। दर्शक अपने कीमती समय और धन का भुगतान फिल्म देखने के लिए करता है, न कि जबरन विज्ञापन देखने के लिए।

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