मेडिकल-सेल्स प्रतिनिधि लेबर कोड के विरोध में उतरे:FMRAI ने केंद्रीय श्रम मंत्री को ज्ञापन भेजा, 1976 के अधिनियम की रक्षा की मांग

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में मेडिकल और सेल्स प्रतिनिधियों ने भी सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई है। फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (एफएमआरएआई) के सदस्यों ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया को ज्ञापन सौंपकर चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग की है। संगठन के प्रतिनिधि दीपक शर्मा ने बताया कि देशभर के लाखों मेडिकल और सेल्स प्रमोशन कर्मचारी 12 संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच द्वारा बुलाई गई आम हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही नई श्रम संहिताएं मजदूर और कर्मचारी विरोधी हैं, जिनसे मौजूदा श्रम सुरक्षा कानून कमजोर होंगे। एफएमआरएआई का कहना है कि यदि चारों लेबर कोड लागू किए जाते हैं, तो सेल्स प्रमोशन इम्प्लॉइज (कंडीशन ऑफ सर्विस) एक्ट-1976 का दायरा सीमित हो जाएगा। यह अधिनियम मेडिकल और सेल्स प्रतिनिधियों की सेवा शर्तों, नौकरी की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करता है। संगठन के अनुसार, नई व्यवस्थाओं के तहत कंपनियों को सेवा शर्तों में मनमाने बदलाव का अधिकार मिल सकता है। इससे कर्मचारियों की नौकरी और सामाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। ज्ञापन में चारों लेबर कोड निरस्त करने, 1976 के अधिनियम को यथावत रखते हुए उसे और अधिक सशक्त बनाने तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। इस दौरान विनोद गोयल, नील कालड़ा, नवनीत डोडा, गौरव सेतिया, गणेश चौधरी, बीके चौधरी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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