मेहंदीपुर बालाजी के रामेष्ट वेद संस्कृत गुरुकुलम में शुक्रवार को सामूहिक उपनयन (जनेऊ) संस्कार एवं वेदारंभ (वेदों के अध्ययन का प्रारंभ) संस्कार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गुरुकुलम के महंत डॉ. नरेश पुरी महाराज के सान्निध्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि एवं स्टूडेंट मौजूद रहे। महंत डॉ. नरेश पुरी महाराज ने कहा- भारतीय सनातन संस्कृति में संस्कार जीवन को सफल, अनुशासित और सार्थक बनाते हैं। संस्कार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाते हैं। भारतीय संस्कृति में 16 संस्कार माने गए हैं, जिनमें उपनयन और वेदारंभ संस्कार बालक के बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास की मजबूत नींव रखते हैं। ये संस्कार बालक को ज्ञान, संयम और कर्तव्य के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। स्टूडेंट्स को वैदिक ग्रंथों का किया वितरण कार्यक्रम के दौरान स्टूडेंट्स को वैदिक ग्रंथों का वितरण किया गया, जिससे वे प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ सकें। जनप्रतिनिधियों ने किया स्वागत इस मौके पर विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों ने महंत डॉ. नरेश पुरी महाराज का कर सम्मान किया। हनुमान चालीसा का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा हनुमान चालीसा को नाटक के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस दौरान टीवी की प्रसिद्ध लोक गायिका आकांक्षा राव ने भजनों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में सुदामा कुटी, वृंदावन से नाभापीठाधीश्वर सुतीक्ष्ण महाराज, गलता पीठ से स्वामी अवधेशाचार्य महाराज, संत समाज अध्यक्ष महामंडलेश्वर सियाराम दास महाराज, अखिल भारतीय संत समिति के प्रदेश महामंत्री एवं निर्मोही अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता राधे बाबा निर्मोही, संयुक्त भारतीय धर्म संसद से आदरणीय आचार्य राजेश्वर तथा हरिद्रानंद महाराज (ध्रुवघटा) सहित अनेक प्रमुख संत मौजूद रहे।


