राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की जोधपुर बेंच ने मैरिज गार्डन बुकिंग विवाद में स्पष्ट किया है कि कोरोना महामारी के दौरान संक्रमण रोकने के लिए शादी रद्द करना उपभोक्ता की मजबूरी थी, मनमर्जी नहीं। आयोग ने जोधपुर श्री शनिचर जी का थान ट्रस्ट को निर्देश दिया है कि वह परिवादी सुनीता शर्मा को 1 लाख रुपए 6% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाएं। हालांकि, आयोग ने जीएसटी की राशि और जिला आयोग द्वारा लगाए गए हर्जाने को रिफंड के दायरे से बाहर रखा है। यह फैसला 30 दिसंबर 2025 को न्यायिक सदस्य निर्मल सिंह मेड़तवाल और सदस्य लियाकत अली की बेंच ने सुनाया। दो बार टली शादी, फिर हुआ बुकिंग/रिफंड पर विवाद सरदारपुरा निवासी सुनीता शर्मा ने अपनी बेटी की शादी के लिए चौपासनी रोड स्थित श्री शनिचर जी का थान ट्रस्ट का नोहरा और हॉल बुक किया था। शुरुआत में शादी 17-18 मई 2020 को होनी थी, जिसके लिए 18 फरवरी 2020 को 25,000 रुपए का चेक एडवांस दिया गया। लॉकडाउन के कारण शादी टाल दी गई। इसके बाद ट्रस्ट की मांग पर 20 फरवरी 2020 को 1 लाख 18 हजार रुपए और जमा करवाए गए। हालात सामान्य होने पर शादी की नई तारीख 1 और 2 मई 2021 तय की गई। लेकिन कोविड की दूसरी लहर और सरकारी गाइडलाइन को देखते हुए परिवार ने शादी रद्द कर दी। ट्रस्ट ने केवल 25,000 रुपए लौटाए और बाकी राशि जब्त कर ली। इस पर सुनीता शर्मा ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया, जहां से उन्हें रिफंड का आदेश मिला था। ट्रस्ट की दलील: सरकार को जमा हो चुकी है जीएसटी राज्य आयोग में अपील करते हुए ट्रस्ट की ओर से एडवोकेट हिमांशु सोलंकी ने तर्क दिया कि 1 और 2 मई 2021 को राज्य सरकार ने शादियों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया था। उपभोक्ता का पक्ष: बारात गाजियाबाद से आनी थी परिवादिया की ओर से एडवोकेट महेंद्र पारीक ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार की 29 अप्रैल 2021 की गाइडलाइन में शादियों में केवल 50 लोगों की अनुमति थी। कोर्ट का फैसला: शादी न करना सराहनीय कदम दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले में संशोधन किया। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा – “परिवादिया द्वारा दिनांक 01.05.2021 और 02.05.2021 को शादी नहीं किये जाने के कदम को सराहनीय कहा जा सकता है, क्योंकि यदि वे उस वक्त शादी करते तो अवश्य ही कोविड-19 को फैलाने में मदद ही करते।” कोर्ट ने निर्देश दिया:


