मॉडर्न गांव:करेली छोटी में परिवार की संख्या के हिसाब से प्लॉटिंग; न अपराध, न ही अतिक्रमण

श्रीमती कांति साहू के पुत्र निर्मल साहू की रिपोर्ट यह भिलाई या किसी बड़े शहर की टाउनशिप नहीं, बल्कि धमतरी जिले का करेली छोटी गांव है। ये व्यवस्थित टाउनशिप का उदाहरण है, जिसमें 40-40 फीट की दो मुख्य सड़कें, 20-20 फीट चौड़ी 5 गलियां हैं। गांव 1958 में बसना शुरू हुआ। जिस परिवार में जितने बेटे थे, उतने प्लॉट अलॉट हुए। -फोटो: अजीत सिंह भाटिया। धमतरी जिले का करेली छोटी गांव। इसमें व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम है। गांव की अपनी प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था है। सड़क, नाली, भवन, बिजली के साथ गांव व स्कूल की अन्य छोटी-मोटी जरूरतों के लिए यह गांव शासन पर आश्रित नहीं है। ग्राम विकास समिति करीब एक करोड़ रुपए का विकास अपने बूते कर चुकी है। फंड में आज 27 लाख रुपए जमा है। 50 के दशक में जब भिलाई में टाउनशिप आकार ले रही थी, तब यहां 125 किमी दूर धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक का 6000 लोगों की आबादी वाला गांव करेली छोटी भी बस रहा था। सरपंच डॉ. परमेश्वर साहू बताते हैं कि मालगुजार दाऊ पवन अग्रवाल ने 1953 में भोपाल से इंजीनियर बुलाकर गांव का मास्टर प्लान बनवाया। जहां गांव बसना था, वहां निजी खेती भूमि थी। इसलिए पहले 32 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहीत की गई। बदले में किसानों को दूसरी जगह जमीन दी गई। इसके बाद हर परिवार में बेटों की संख्या के हिसाब से पांच-पांच डिसमिल की प्लॉटिंग की गई। पांच साल बाद 1958 में गांव बसना शुरू हुआ। जिस परिवार में जितने बेटे थे, उतने प्लॉट अलॉट किए गए। दशरथ गौंटिया, नर्बदेश्वर शर्मा, पंचमलाल, शोभा मंडल, घनाराम, ईश्वर चंद, चतुर गौंटिया, अर्जुन, बालूराम, रामचरण, नन्हाई, श्यामलाल जैसे तब के ग्राम प्रमुखों ने अपने गांव को ऐसे बसाया कि आज भी यहां ग्रामीण जीवन बेहतर, सुखी और समृद्ध है।
75 साल पहले बड़े-बुजुर्गों की बनाई नियमावली का आज भी अक्षरश: पालन
शिक्षक वेद कुमार साहू और मोहन राम साहू बताते हैं कि करीब 75 साल पहले बड़े-बुजुर्गों द्वारा बनाई गई नियमावली का आज भी तीसरी-चौथी पीढ़ी के लोग अक्षरश: पालन कर रहे हैं। मसलन यहां कोई एक इंच भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण नहीं कर सकता। मकान निर्माण या मरम्मत करने से पहले ग्राम विकास एवं सुरक्षा समिति की मंजूरी जरूरी है। घर का पानी सड़क पर नहीं बहा सकते। गली को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी हर घर की है। खुले में ताश खेलने की मनाही है। नशे में बड़बड़ाता या हंगामा करता है तो ग्राम समिति उसे दंडित करती है।
दिव्य आस्था परिवार करता है अंतिम संस्कार का इंतजाम
यहां 16 वरिष्ठजनों की संस्था दिव्य आस्था परिवार है। इसमें टीचर, डॉक्टर, वकील, किसान सभी शामिल हैं। बीएसपी सीनियर सेकंडरी स्कूल सेक्टर-10 के रिटायर्ड शिक्षक एसआर साहू इसके अध्यक्ष हैं। वे बताते हैं ​िक गांव में किसी की मौत होने पर अंतिम संस्कार का पूरा इंतजाम व शोकाकुल परिवार को आ​​र्थिक मदद भी यह संस्था करती है। समय-समय पर गांव में मेडिकल कैंप लगाते हैं। सफाई, नशापान और पर्यावरण को लेकर भी लोगों को जागरुक करते हैं। गरीब बेटियों के विवाह और बच्चों की पढ़ाई- लिखाई में भी दिव्य आस्था परिवार और ग्राम विकास समिति मदद करती है। 16 जातियां मिल-जुलकर रहती हैं, धान से उन्नति गांव में 327 साहू परिवार हैं। ब्राह्मण, अग्रवाल, वैष्णव, यादव, निषाद, गोड़, राउत, सतनामी, लोहार, सिदार, नाई, धोबी, नगारची और मुस्लिम सहित 16 जातियों के लोग रहते हैं। दोनों सीजन में महानदी से लगी भूमि धान से लहलहाती है। प्रति एकड़ 30 से 40 क्विंटल धान के उत्पादन ने इस गांव को समृद्ध और खुशहाल बना दिया है। बड़ी संख्या में पढ़- लिखकर युवा खेती कर रहे हैं।
थाने में कोई FIR नहीं, आपस में सुलझाते हैं केस बुजुर्ग जनक वैष्णव, शांतनु राम साहू और देवनाथ साहू बताते हैं कि गांव की संस्कृति ऐसी है कि कोई विवाद नहीं होता। कभी अनबन हो भी जाए तो लोग आपस में सुलझा लेते हैं। यही वजह है कि थाने में न एफआईआर दर्ज है, न ही अदालत में मामला। विवाद सुलझाने ग्राम विकास एवं सुरक्षा समिति है। अध्यक्ष अपनी मर्जी से 7 से 15 सदस्य मनोनीत करते हैं। जिसका फैसला सभी को मान्य होता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *