भास्कर न्यूज | बिलासपुर /कोरबा पॉम मॉल बनाने के लिए निजी जमीन पर कब्जे की शिकायत के पांच साल बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। हाई कोर्ट ने कोरबा के एसपी से शपथ पत्र मांगा था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने संबंधित मजिस्ट्रेट को पुलिस की सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर विधि के अनुसार आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं। कोरबा निवासी अंकित सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। मामले में खुद पक्ष रखते हुए बताया कि कोरबा के पाम मॉल निर्माण के दौरान उनकी जमीन पर अवैध कब्जा और राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गईं। इस संबंध में उनकी मां ने वर्ष 2020 में कोरबा के कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन पांच साल बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इस मामले को लेकर कोरबा के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की कोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को सात बिंदुओं पर 60 दिनों में आगे की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्धारित अवधि में रिपोर्ट पेश नहीं की गई। हाई कोर्ट ने कोरबा के एसपी से शपथपत्र मांगा था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कहा गया कि जांच विधि के अनुसार की गई है। राजस्व अभिलेखों की प्राप्ति और विभागीय पत्राचार के कारण देरी हुई। कोरबा के एसपी ने शपथपत्र प्रस्तुत कर बताया कि सातों बिंदुओं पर जांच कर अंतिम सप्लीमेंट्री रिपोर्ट 7 फरवरी को ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत कर दी गई है। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि अब रिपोर्ट प्रस्तुत हो चुकी है। यदि याचिकाकर्ता को रिपोर्ट से किसी तरह की आपत्ति है तो वे विधि सम्मत उपाय अपना सकते हैं। वहीं हाई कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लें।


