प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्वयंपाठी विद्यार्थियों से वसूले जा रहे विमर्श शुल्क का मुद्दा बुधवार को विधानसभा में गरमाया। कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा तो दैनिक भास्कर ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में पड़ताल की। इसमें सामने आया कि विमर्श शुल्क की तरह यहां विद्यार्थियों से चुनाव और यूनियन मद में भी शुल्क वसूला जा रहा है। जबकि यहां पिछले तीन वर्षों से छात्रसंघ चुनाव ही नहीं हुए हैं। सुविवि के संघटक कॉलेज आर्ट्स, लॉ, कॉमर्स, साइंस, इंजीनियरिंग और बिलोता गर्ल्स कॉलेज के करीब 14,500 विद्यार्थियों से पांच अलग-अलग मदों में प्रति विद्यार्थी 535 रुपए लिए जा रहे हैं। इस प्रकार सालाना 77 लाख 55 हजार 500 रुपए वसूले जा रहे हैं। सवाल यह है कि जब चुनाव और प्रमुख सांस्कृतिक गतिविधियां हुई ही नहीं तो यह राशि किस मद में खर्च हुई और यदि खर्च नहीं हुई तो ऑडिट में इसका हिसाबकैसे होगा। चुनाव कराने या न कराने का निर्णय राज्य सरकार लेती है चुनाव कराने या न कराने का निर्णय राज्य सरकार लेती है। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार ने चुनाव नहीं कराए थे। इसके बाद वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार में भी चुनाव नहीं हुए। ऐसे में शुल्क वसूली को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के पास स्पष्ट जवाब नहीं है। विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक परंपरा की पहली सीढ़ी हैं। इससे विद्यार्थियों में नेतृत्व, संवाद और संगठनात्मक क्षमता विकसित होती है तथा वे अपनी शैक्षणिक व प्रशासनिक समस्याएं संस्थागत रूप से उठा पाते हैं। नियमित चुनाव नहीं होने से छात्र भागीदारी घटती है और निर्णय प्रक्रिया एकतरफा होने का खतरा बढ़ता है। फीस का गणित यूनिवर्सिटी में प्रति स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन फीस 65 रु, कॉलेज में प्रति स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन फीस 80 रु, यूनिवर्सिटी में प्रति स्टूडेंट यूनियन फीस 130 रुपए, कॉलेज में प्रति स्टूडेंट यूनियन फीस 130 रुपए और प्रति स्टूडेंट मनोरंजन फीस 130 रुपए वसूले जा रहे हैं। ये राशि प्रति छात्र कुल 535 रुपए है।


