भागीरथपुरा जल कांड से उठे सवालों के बीच महापौर ने जमीनी सच्चाई से ध्यान हटाने के लिए एक और बड़ा दावा उछाल दिया। इस बार निशाने पर रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2017 में लॉन्च की गई म्युनिसिपल बॉन्ड योजना, जिसका श्रेय महापौर ने इंदौर नगर निगम को दे डाला। महापौर ने एक दिन पहले मीडिया के सामने दावा किया कि केंद्रीय बजट में नगरीय निकायों के लिए घोषित बॉन्ड प्रावधान इंदौर निगम द्वारा जलूद सोलर प्लांट के लिए लाए गए ग्रीन बॉन्ड से प्रेरित है। इसके लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का आभार भी जताया। ऐसे समझिए कैसे महापौर का दावा पूरी तरह बोगस म्युनिसिपल बॉन्ड की मूल योजना केंद्र सरकार ने 2017 में ही लॉन्च कर दी थी। उस वक्त अधिकतम सीमा 200 करोड़ रुपए तय की गई थी। जबकि ताजा बजट में कोई नई योजना नहीं लाई गई, बल्कि सिर्फ बड़े नगर निगमों के लिए सीमा बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपए की गई है। इंदौर भी बॉन्ड पहली बार नहीं लाया महापौर का यह दावा भी गलत है कि इंदौर निगम ने जलूद सोलर प्लांट के लिए पहली बार बॉन्ड जारी कर इतिहास रचा। इससे पहले 2018 में इंदौर निगम ने अमृत योजना के लिए 140 करोड़ रुपए का म्युनिसिपल बॉन्ड जारी किया था। इतना ही नहीं इस पर केंद्र सरकार ने 18.2 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया। महापौर 2023 में जलूद सोलर प्लांट के लिए 244 करोड़ का बॉन्ड लाया गया। इस पर केंद्र ने 20 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया था। स्टॉक एक्सचेंज लिस्टिंग के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी वित्तीय जानकारों के मुताबिक, केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना कोई भी म्युनिसिपल बॉन्ड संभव ही नहीं है, क्योंकि इसकी लिस्टिंग स्टॉक एक्सचेंज में होती है। ऐसे में यह दावा कि केंद्र ने इंदौर के प्रयोग को देखकर नीति बनाई, यह भी गलत ही है। 2017 से देश के दर्जनों नगर निगम जारी कर चुके बॉन्ड 2017 के बाद देश के दर्जनों नगर निगम म्युनिसिपल बॉन्ड जारी कर चुके हैं। 2019 में ही केंद्र सरकार ने विभिन्न निगमों को 181.33 करोड़ रुपए का इंसेंटिव बांटा था। इंदौर के अलावा भोपाल नगर निगम भी 200 करोड़ रुपए का बॉन्ड ला चुका है।


