यज्ञ-हवन नहीं हो पाएंगे लेकिन विष्णु जी की पूजा अशुभ होने से बचाएगी

भास्कर न्यूज | जालंधर साल की शुरुआत होते ही पहला बड़ा त्योहार होली ही होता है। होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से ही होलाष्टक लग जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक का प्रारंभ होता है। फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक का समापन होता है। होली पर्व से 8 दिनों पहले सारे शुभ कार्य पर रोक लग जाती है। जोकि इस बार होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो चुके है जोकि 3 मार्च को होलिका दहन के साथ खत्म हो जाएगा। धार्मिक मान्यता के मुताबिक सूर्य उदय के साथ तिथि की शुरुआत होती है। होलाष्टक दोष होने की वजह से सभी शुभ काम पर रोक रहेगी। इन 8 दिनों में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाएंगे। इन दिनों भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा करने से किसी भी तरह का अशुभ नहीं होता। श्री शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर कमल विहार बस्ती पीरदाद के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाना चाहिए। इन दिनों में शुभ कार्यों के लिए ग्रहों की ये स्थिति अच्छी नहीं मानी जाती है। इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। जिसमें विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नए मकान, वाहन, प्लॉट या दूसरे प्रॉपर्टी, मकान-वाहन की खरीदारी आदि होलाष्टक में वर्जित है। होलाष्टक के समय में कोई नया कार्य जैसे बिजनेस, निर्माण कार्य या नई नौकरी भी करने से बचना चाहिए। होलाष्टक के समय में कोई भी यज्ञ, हवन आदि कार्यक्रम नहीं करना चाहिए। लेकिन देवी-देवताओं की अराधना के लिए ये दिन बहुत ही श्रेष्ठ माने जाते हैं, होलाष्टक शब्द होली और अष्टक से मिलकर बना है। इसका अर्थ है होली के आठ दिन देशभर में होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को किया जाता है, पूर्णिमा से आठ दिन पहले से होलाष्टक लग जाता है। उन्होंने बताया कि होलाष्टक में शुभ कामों की मनाही होती है लेकिन लेन-देन और निवेश पर रोक नहीं होने से खरीदारी की जा सकेगी। होली की प्रचलित कथा राजा हिरण्यकश्यप बेटे प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करना चाहते थे। यातनाओं के 8वें दिन बहन होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान था) के गोदी में प्रहलाद को बैठा कर जला दिया, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच गए और होलिका आग में जलकर मर गई। अतः ऐसे में इन आठ दिनों को अशुभ माना जाता है और कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।

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