सिद्धार्थनगर में फंदे पर लटक रहे युवक को पुलिस ने डेढ़ मिनट में बचाया। मां से खाने को लेकर विवाद हुआ, इसके बाद उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया। मां के चिल्लाने पर करीब 200 लोगों की भीड़ लग गई। सूचना मिलते ही करीब 1 मिनट में पुलिस वहां पहुंची। चौकी इंचार्ज, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल जब दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे, तो वह फंदे पर लटका तड़प रहा था। चौकी इंचार्ज और हेड कॉन्स्टेबल ने युवक को गोद में उठाया और कॉन्स्टेबल ने रस्सी काटी। इसके बाद वह जमीन पर तड़पता रहा। पुलिस गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले गई। जहां डॉक्टरों के इलाज से उसकी जान बची। दरअसल, पुलिस उससे सिर्फ 500 मीटर ही दूर थी। पुलिस ने करीब डेढ़ मिनट में युवक को बचाया। जबकि गांव के लोग उसे मरा समझ चुके थे, तभी कोई दरवाजा तोड़कर अंदर जाने की कोशिश नहीं कर रहा था। पहले देखिए 2 तस्वीरें… अब पढ़िए पूरा मामला… सेमरा निवासी विजय कुमार पुत्र स्व. विनय कुमार (27 वर्ष) मुंबई में काम करता है। वह कुछ दिन पहले ही मुंबई से गांव लौटा था। मां और पत्नी में अक्सर झगड़ा होता था। इसलिए पत्नी घर छोड़कर मायके में रह रही है। इसके बाद से युवक मानिसक रूप से परेशान था। 6 फरवरी की शाम 7 बजे खाना नहीं मिलने पर मां से उसकी बहस हुई। इसके बाद वह कमरा बंद करके फंदा लगाने लगा। मां के चीखने-चिल्लाने पर भारी भीड़ जुट गई। इसी दौरान गांव के रहने वाले रिजवान ने चौकी इंचार्ज राजेश कुमार तिवारी को फोन करके सूचना दी। संयोग से उस समय चौकी इंचार्ज राजेश कुमार तिवारी, हेड कॉन्टेबल ओमपाल गौतम और कॉन्स्टेबल पवन सिंह घटनास्थल से सिर्फ 500 मीटर दूर बजहा क्षेत्र में गश्त पर थे। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मिनट- सवा मिनट में वहां पहुंची। वहां देखा कि करीब 200 लोगों की भीड़ लगी है। हालांकि कोई भी युवक को बचाने की कोशिश नहीं कर रहा था। सभी उसे मरा मान चुके थे। ग्रामीण मरा समझ चुके थे
चौकी इंचार्ज राजेश कुमार तिवारी ने दरवाजा बंद होने के कारण रोशनदान से कमरे के अंदर झांक कर देखा। विजय का ऊपरी हिस्सा फंदे पर दिखाई दिया, जबकि पैर में हल्की कंपन दिखी। दरअसल, परिजन और ग्रामीण मान चुके थे कि विजय की मौत हो चुकी है। इसके बाद चौकी इंचार्ज राजेश कुमार तिवारी और कॉन्स्टेबल पवन सिंह दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे। देखा कि विजय अभी जीवित था। तत्काल चौकी इंचार्ज ने विजय के पैरों को सहारा दिया और कुंडी से लगे फांसी के फंदे को कटवाया। विजय कुमार को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बर्डपुर पहुंचाया गया, जहां एक दिन तक इलाज चला। इसके बाद विजय की हालत में सुधार हुआ और अब उसकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है। 8 महीने पहले हुई थी शादी
विजय कुछ दिन पहले ही मुंबई से अपने गांव आया था। उसकी शादी 8 महीने पहले हुई थी और उसकी पत्नी इस समय मायके में थी। पत्नी को घर वापस बुलाने को लेकर पारिवारिक तनाव था। विजय ने कहा कि समय पर खाना न मिलने के कारण मां से नाराज था। परिवार को सबक सिखाने के इरादे से उसने यह कदम उठाया। विजय के परिवार में उसकी मां माया देवी, एक छोटा भाई और उसकी पत्नी हैं। विजय के पिता विनय कुमार ने करीब 1 साल पहले नेपाल में कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। ———————————–
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