युवाओं में बढ़ रही ‘फ्रीक्वेंट यूरिनेशन’ की समस्या:ऑफिस में बार-बार जा रहे वॉशरूम तो अलर्ट रहें; चपेट में हैं 20 फीसदी प्रोफेशनल्स

यूपी के युवाओं में ऑफिस ऑवर्स के दौरान फ्रीक्वेंट यूरिनेशन यानी कई बार पेशाब करने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसकी जद में नौजवान पुरूष और महिलाएं दोनों हैं। इस समस्या का कारण तनाव, ऑफिस का वर्क प्रेशर और लाइफ स्टाइल में बदलाव है। KGMU के यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विश्वजीत सिंह का कहना है कि ऐसी समस्याओं का समय रहते निदान बहुत जरूरी है। ऐसा न करने से परेशानी और बढ़ सकती है। साथ ही शरीर में कई दूसरी परेशानियां भी पैदा हो सकती हैं। OPD में इस तरह के 20% मरीज
प्रो. विश्वजीत सिंह का कहना है कि IT, बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग सहित तमाम फील्ड्स के प्रोफेशनल्स में ओवर एक्टिव ब्लैडर्स की समस्या आम हो चुकी है। KGMU के यूरोलॉजी विभाग की OPD में रोजाना 20% तक मरीज इसी समस्या के साथ डॉक्टर के पास पहुंच रहे हैं। क्या है ओवर एक्टिव ब्लैडर्स?
प्रो. विश्वजीत कहते हैं कि ये बेहद कॉमन ट्रेंड बन चुका है। इसमें शिकायत यह रहती है कि ऑफिस में काम पर रहते हैं, तो बार-बार वाशरुम जाना पड़ता है। यानी फ्रीक्वेंसी ऑफ यूरिनेशन बढ़ जाती है। साइंटिफिक शब्दों में इस ओवर एक्टिव ब्लैडर्स कहते हैं। इसके पीछे मल्टीपल फैक्टर होते हैं। इन कारणों से बढ़ रही परेशानी
स्ट्रेस और एंजाइटी इसके पीछे सबसे बड़ा फैक्टर है। खास बात यह है कि ऑफिस में तो काम का दबाव है ही, घर पर भी काम का दबाव है। दोनों जगह अत्याधिक दबाव होने के चलते शरीर पर इसका प्रभाव दिखने लगता है। इसके अलावा करियर को लेकर चिंता भी बड़ी वजह है। बदलती लाइफस्टाइल भी अहम
प्रो. विश्वजीत कहते हैं कि इसके पीछे लाइफस्टाइल में बदलाव भी एक बड़ी वजह है। स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन भी फैक्टर हो सकता है। बॉडी क्लॉक में बदलाव यानी देर रात तक जगना और सुबह देर से उठना भी इसकी वजह है। फिजिकल वर्क आउट में कमी
इसके अलावा फिजिकल वर्क आउट की कमी भी एक वजह है। ज्यादातर प्रोफेशनल लॉन्ग टाइम सिटिंग प्रोफाइल्स से जुड़े हैं। ऐसे में इनका स्क्रीन स्पेंडिंग टाइम भी बेहद ज्यादा है। इसके अलावा मोबाइल एडिक्शन जैसे कारण भी वजह बनते हैं। ट्रीटमेंट के लिए यहां जाना जरूरी
प्रोफेसर विश्वजीत कहते हैं कि यह इस समस्या को इग्नोर नहीं करना चाहिए। इलाज के लिए बेहतर होगा कि किसी एक्सपर्ट यूरोलॉजिस्ट के पास ही जाएं। बिना झिझक पूरी परेशानी डॉक्टर को बतानी चाहिए। कई बार हल्की मेडिकेशन से और लाइफस्टाइल में बदलाव से राहत मिल जाती है। पर्सनल काउंसिलिंग भी कारगर
काउंसिलिंग भी कई मरीजों में बेहद असरदार साबित होती है। ऐसे में बिना किसी संकोच डॉक्टर को समस्या बतानी चाहिए। ऐसी लगभग सभी समस्याओं का इलाज है। इसलिए ये नहीं मान लेना चाहिए कि बिना इलाज के ही सब कुछ नॉर्मल लाइफ का हिस्सा है। यह भी पढ़ें लखनऊ के सिविल हॉस्पिटल में मेडिकोज बन रहे एक्सपर्ट:एडवांस इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट की मिल रही ट्रेनिंग; फॉरेन से की थी पढ़ाई लखनऊ के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल में इंटर्नशिप करने वाले मेडिकोज अब एडवांस लाइफ सपोर्ट में भी पारंगत हो रहे। यहां हर साल 40 मेडिकोज को इंटर्नशिप का मौका मिलता है। खास बात ये है कि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें राउंड द क्लॉक इमरजेंसी केयर और मेडिसिन की कई एडवांस फील्ड में एक्सपोजर का मौका मिल रहा है। पढ़ें पूरी खबर…

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