जिले के गांव सड़ियां में निर्माण कामगारों के लिए एक विशेष जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया। इस दौरान जम्मू राम ने मजदूरों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत किया। कैंप में गांव निवासी पार्थराज ने बताया कि उन्हें सरकारी सुविधाओं की कोई जानकारी नहीं थी और जम्मू राम के प्रयासों से ही उन्हें योजनाओं का पता चला। इसी बीच भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया जहां एक शिक्षित मजदूर गुरविंदर सिंह को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन नेताओं ने खुलासा किया कि केवल 1700 रुपए की रिश्वत न देने के कारण गुरविंदर सिंह की लेबर कॉपी नहीं बनाई गई। यूनियन के नेताओं का कहना है कि कैंप लगाने की जिम्मेदारी श्रम विभाग के निरीक्षकों की है लेकिन उनके काम न करने के कारण यूनियन को आगे आना पड़ रहा है। कैंप में मौजूद मजदूर सुखविंदर सिंह ने बताया कि उनके खाते में पैसे शो तो हो रहे हैं पर मिल नहीं रहे। यूनियन के जिला सचिव हरभजन छप्पड़ी वाला और ब्लॉक प्रधान हरचरण पालीवाला ने भी गांव-गांव जाकर मजदूरों को संगठित करने पर जोर दिया ताकि सरकारी मशीनरी की मनमानी को रोका जा सके। यूनियन नेताओं ने दुख जताया कि यदि गुरविंदर सिंह की लेबर कॉपी समय पर बन जाती तो उसे अपनी नवजात बेटी के लिए बालड़ी तोहफा योजना के तहत 75000 रुपए और अन्य लाभ मिल सकते थे। गुरविंदर सिंह ने अपनी कॉपी बनवाने के लिए सभी जरूरी दस्तावेज और सरपंच का सत्यापन जमा करवा दिया था फिर भी उसे दफ्तरों के चक्कर कटवाए गए। कंस्ट्रक्शन वर्कर लेबर यूनियन के जिला प्रधान जम्मू राम ने स्पष्ट किया कि इस मामले को उच्च अधिकारियों और लेबर कमिश्नर के समक्ष उठाया जाएगा। उन्होंने मांग की गई कि विभागीय देरी के कारण पिछड़े मजदूरों को ग्रेस पीरियड के तहत राहत दी जाए। यूनियन ने चेतावनी दी गई कि यदि गुरविंदर सिंह जैसे पात्र मजदूरों को उनका हक नहीं मिला तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त मोर्चा खोला जाएगा। हरभजन छप्पड़ी वाला और हरचरण पालीवाला ने पूरी टीम के साथ संकल्प लिया कि वे घर-घर जाकर शत प्रतिशत मजदूरों का पंजीकरण सुनिश्चित करेंगे ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सके। ^ एएलसी गुरप्रीत सिंह ने कहा कि उनको इस संबंधी कोई जानकारी नहीं है यदि फिर भी लाभार्थी से कोई पैसे की मांग करता है तो वह सीधा उनसे संपर्क कर सकता है।


