रंगमंच की रोशनी में समाज को प्रतिबिंब दिखा रहा संयुक्त नाट्य कला केंद्र

विश्व रंगमंच दिवस (वर्ल्ड थियेटर डे) आज पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। यह दिन न केवल रंगकर्मियों के लिए बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। रंगमंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह समाज का दर्पण भी है। नाटक, संवाद और भावनाओं के माध्यम से यह समाज की समस्याओं, संघर्षों और सच्चाइयों को उजागर करता है। घाटशिला में रंगमंच की छह दशक पुरानी परंपरा : घाटशिला की रंगमंच परंपरा छह दशक पुरानी है। यहां के कई नाटककारों ने आधुनिक भारतीय रंगमंच को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। रंगमंच के वरिष्ठ कलाकार सूजन सरकार ने बताया कि घाटशिला में 1960 से नाटक सामाजिक जागरूकता का प्रभावी माध्यम रहा है। मऊभंडार के बाबू लाइन इवनिंग क्लब, नेताजी पाठागार, महुआ, डूबांग डूबांग, मादल, दर्पण, प्रयासी, विभूति स्मृति संसद, इफ्टा और संयुक्त नाट्य कला केंद्र के बैनर तले समय-समय पर रंगकर्मी नाटकों के माध्यम से समाज की सच्चाई को उजागर करते आए हैं। रंगमंच के महान कलाकारों की विरासत : शुरुआती दौर में स्व. रामप्रसाद गुप्ता, स्व. भोलानाथ साई, स्व. दिवाकर दत्ता, स्व. बादल मजूमदार, स्व. रंजीत बोस जैसे रंगकर्मियों ने नाटक को सामाजिक परिवर्तन का जरिया बनाया। आज संयुक्त नाट्य कला केंद्र के युवा रंगकर्मी इंद्र राय, सुशांत सीट, शेखर मल्लिक, संजय मुखी, गणेश मुर्मू, प्रसेन्नजीत कर्मकार, अर्प भट्टाचार्य, ज्योति मल्लिक और देवजानी दे भारतीय रंगमंच की समृद्ध धरोहर को जीवंत बनाए रखने के प्रयास में जुटे हैं। विभूति मंच पर आज दो नाटकों का मंचन : विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर फूलडुंगरी के विभूति मंच पर संयुक्त नाट्य कला केंद्र के बैनर तले गुरुवार को दो नाटकों का मंचन होगा। इस आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बदलते दौर में भी थिएटर की लोकप्रियता बनी हुई है। अब प्रयोगात्मक थिएटर, स्ट्रीट प्ले, माइम एक्ट और ऑनलाइन स्टेज परफॉर्मेंस जैसी विधाओं का चलन बढ़ रहा है। शाम 7:00 बजे: बांग्ला नाटक – “मधुर प्रस्ताव” रात 8:00 बजे: हिंदी नाटक – “कन्यादान”

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