रंगोत्सव में दो दिन रहेगी पूर्णिमा, इस बार भद्रा और चंद्रग्रहण का बन रहा संयोग

भास्कर न्यूज|गुमला फाल्गुन पूर्णिमा दो दिन होने से इस बार होलिका दहन के एक दिन बाद रंगों का त्योहार होली मनाया जाएगा। फाल्गुन की पूर्णिमा (सोमवार) 2 मार्च की शाम 5.18 बजे से शुरू होकर मंगलवार 3 मार्च की शाम 4.33 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा पर इस बार भद्रा और चंद्रग्रहण का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में होलिका दहन के लिए तीन नियम बताए गए हैं। इसके लिए रात्रिकाल, पूर्णिमा तिथि व भद्रा मुक्त काल होना चाहिए। व्रत की पूर्णिमा में सोमवार की शाम पूर्णिमा के साथ भद्रा भी शुरू हो रहा है, जो मंगलवार तक रहेगा। ऐसे में भद्रा की समाप्ति पर 4.56 प्रातः होगी। प्रातः 5 बजे होलिका दहन किया जाएगा। ज्योतिष हरिशंकर मिश्रा ने बताया कि सामान्यतः पूर्णिमा की रात्रि में होलिका दहन और अगले दिन प्रातःकाल रंगोत्सव (होली) मनाया जाता है, लेकिन इस बार पंचांग गणना और शास्त्रीय निर्णय के आधार पर पर्व-तिथियों में आंशिक परिवर्तन है। फाल्गुन पूर्णिमा का आरंभ 2 मार्च की सायंकाल से होकर 3 मार्च की सायंकाल तक रहेगा। पूर्णिमा लगते ही भद्रा का प्रवेश हो जाएगा। धर्मशास्त्रों में भद्रा के मुखकाल में शुभकार्य वर्जित बताए गए हैं। अगर सूर्योदय से पूर्व भद्रा की समाप्ति न हो तो पुच्छ काल मे होलिका दहन करना चाहिए। चूंकि प्रातः 4.56 में भद्रा की समाप्ति हो जा रही है, अतः प्रातः 5 बजे होलिका दहन करना उचित है। 3 मार्च को सायंकाल चंद्रग्रहण का योग है। ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। इसमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। इसी कारण 3 मार्च को होली मनाना शास्त्रोचित नहीं है। ग्रहण का मोक्ष सायं 05.33 बजे पर होगा: पंडित हरिशंकर मिश्रा के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 3 मार्च मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय कालीन पूर्णिमा में कुलदेवी को सिंदूर अर्पण होगा। भारतीय समय के अनुसार खग्रस्त चंद्रग्रहण का प्रारंभ 3 मार्च को दिन के 4.33 बजे पर होगा। ग्रहण का मोक्ष सायं 05.33 बजे पर होगा। इस ग्रहण का प्रारंभ भारत के किसी स्थान में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि चंद्रोदय होने से पूर्व पूर्णिमा व ग्रहण की समाप्ति हो जा रही है।

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