रंग पंचमी पर कुंवारी कन्याओं ने बरसाए लट्ठ:जांजगीर के पंतोरा गांव में बांस की छड़ी से लोगों दिया आशीर्वाद,मान्यता है इससे नहीं होती बीमारी

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के पंतोरा गांव में रंग पंचमी पर अनूठी लठमार होली का आयोजन किया गया। इस परंपरा में कुंवारी कन्याएं मां भवानी मंदिर में बांस की छड़ी की पूजा करती हैं। यहां के लोगों का मानना है कि, इस तरह से होली खेलने से उन्हें कोई बीमारी नहीं होती है। दरअसल, जिले के पंतोरा गांव में यह परंपरा पिछले 300 सालों से चली आ रही है। होली के 5वें दिन रंग पंचमी पर स्थानीय लोग लट्ठमार होली खेलते हैं। गांव के मंदिर से भगवान पर छड़ी मारकर इसकी शुरुआत की जाती है। इस दिन गांव से कोई राहगीर निकलता है, तो वह भी इसमें शामिल हो जाता है। कन्याएं पहले देवी-देवताओं पर छड़ी बरसाती हैं मड़वा रानी के जंगल से लाई गई बांस की छड़ियों को अभिमंत्रित किया जाता है। कन्याएं पहले देवी-देवताओं पर छड़ी बरसाती हैं, फिर गाजे-बाजे के साथ गांव में निकलती हैं। गांव के लोग इन कन्याओं का स्वागत रंग-गुलाल से करते हैं और उनसे छड़ी से प्रहार कराकर आशीर्वाद लेते हैं। छड़ी खाने से गांव में कोई बीमारी नहीं आती गांव की बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि मां भवानी के आशीर्वाद स्वरूप छड़ी खाने से गांव में कोई बीमारी नहीं आती। मंदिर के बैगा के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत कब हुई, यह तो पता नहीं है, लेकिन मान्यता है कि मां भवानी और मड़वा रानी की पूजा से गांव सुरक्षित रहता है। रंग पंचमी के दिन राहगीर भी इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनते हैं। वे भी कन्याओं से छड़ी खाकर मुस्कुराते हुए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह परंपरा जांजगीर-चांपा जिले के पंतोरा गांव की विशेष पहचान बन गई है। हर साल लोग इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

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