रफ्तार ने ली थी चार की जान, आंखो देखी कहानी:ट्रॉली पलटी तो बच्चे-महिला दबे हुए थे, किसी का माथा फटा था, कोई बेहोश

“मैं, ट्रैक्टर पर आगे बैठा था। पीछे ट्रॉली में जड़ी-बूटी का माल भरा था और आदिवासी बैठे थे। जिसमें 5 बच्चे, 15 महिलाएं और 11 युवक थे। ट्रैक्टर चालक जगदीश गुर्जर तेज रफ्तार में वाहन को दौड़ा रहा था। बहुत समझाया, लेकिन नहीं माना। अपने गांव से 10 किलाेमीटर दूर जखौदा तिराहा पर पहुंचे ही थे कि ढलान पर उतरते समय अचानक भैंस सामने आ गई। अचानक स्टेयरिंग मोड़ने पर ट्रॉली पलट गई। हर तरफ चीख-पुकार मची थी। तीन लोग उसके नीचे दबे थे, जिसमें एक पिता-पुत्र और एक महिला थी। एक बुजुर्ग महिला उचटकर दूर जा गिरी थी। इनकी तो मौके पर ही मौत हो गई थी। ट्रॉली और सामान के बीच में कई बच्चे और महिलाएं दब गए थे। किसी का माथा फटा था तो कोई चीख रहा था। मैंने ट्रैक्टर चालक की मदद से ट्रॉली को सीधा किया। इसके बाद स्थानीय लोग आ गए। कई घायल तो वहां एक घंटे तक तड़पते रहे।’ जैसा की घटना के चश्मदीद रामलखन आदिवासी निवासी कैंथ गांव घाटीगांव ने दैनिक भास्कर को आंखों देखी बताई है। ट्रॉली सीधी कर चालक गाड़ी लेकर भाग गया
रामलखन ने बताया कि हादसे के समय हम चार लोग ट्रैक्टर पर आगे सवार थे। हादसा हुआ तो हम चार लोगों ने मिलकर ट्रॉली को सीधा किया। इसके बाद ट्रैक्टर चालक डॉक्टर की मदद लेकर आने की कहकर वहां से ट्रैक्टर लेकर भाग गया। यदि वह रुक कर मदद करता तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
एक घंटे बाद आई पुलिस
घटना के बाद कुछ स्थानीय लोग वहां पहुच गए थे, जिन्होंने पुलिस को सूचना दी। सूचना देने के एक घंटे बाद पुलिस और प्रशासन की टीम वहां पहुंची और घायलों को हॉस्पिटल पहुंचाया। पुलिस के आने तक ठंड में सड़क पर घायल पड़े-पड़े लोग तड़पते रहे।
दस दिन पहले निकले थे औषधि लेने
रामखन ने बताया कि हादसे में पिता-पुत्र सहित चार लोगों की मौत हो गई है, 15 घायल हैं। घायल और मृतक सभी घाटीगांव के कैंथ गांव स्थित आदिवासी का पुरा के रहने वाले हैं। गरीब और मजदूर परिवार हैं। यह मजदूरी करने के लिए एक ठेकेदार के साथ 10 दिन पहले गांव से निकले थे। शनिवार शाम काम पूरा होने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली में औषधि लादने के बाद गांव के लिए निकले थे। रात 10.30 बजे के लगभग यह हादसा हो गया।
पिता-पुत्र की मौत, बिखर गया घर
हादसे में चार लोगों की मौत हुई है। जिसमें एक पिता-पुत्र भी शामिल हैं। हादसे में 46 वर्षीय रामदास आदिवासी और उसके बेटे 14 वर्षीय अरुण की ट्रॉली के नीचे कुचलकर मौत हो गई थी। ऐसा पता लगा है कि रामदास बेटे अरुण को साथ ले जाना नहीं चाहता था, लेकिन अरुण जाने की जिद करने लगा। जिस पर पिता को उसे साथ ले जाना पड़ा था। हादसे में पति और बेटे की मौत की खबर से मां बेसुध हो गई है।
ऐसे समझिए पूरा हादसा
ग्वालियर के घाटीगांव विकासखंड के कैंथ गांव से 10 दिन पहले सहारिया आदिवासी समुदाय के 31 लोग पई खो गांव से जंगल में शतावरी वन औषधि की जड़ खोदने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर गए थे। जड़ खोदने के बाद उसको ट्राली में भरकर सभी लोग शनिवार शाम 5 बजे अपने गांव कैंथ थाना घाटीगांव आ रहे थे। रास्ते में जखौदा तिराहे से आगे रात 10.30 बजे के लगभग अचानक ट्रैक्टर-ट्रॉली के सामने एक भैंस आ गई, जिसको बचाने के चक्कर में तेज रफ्तार में ड्राइवर ने स्टीयरिंग मोड दी और ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटते ही उसमें सवार सभी लोग सड़कों पर आ गिरे। हादसे में एक नाबालिग, दो महिलाओं सहित चार लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे कुचल गए, जबकि 15 से ज्यादा घायल हो गए थे।
इन चार लोगों की हुई मौत
ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से हुए हादसे में 45 वर्षीय फूलवती पत्नी पप्पू आदिवासी, 46 वर्षीय रामदास आदिवासी, 14 वर्षीय अरुण पुत्र रामदास आदिवासी, 65 वर्षीय कस्तूरी बाई पत्नी जंगलिया आदिवासी निवासी कैत गांव घाटीगांव की मौत की पुष्टि हो गई है। पुलिस ने शवों को निगरानी में लेकर डेड हाउस में रखवा दिया हैं।
रफ़्तार तेज थी, समझाया पर नहीं माना
रामचित्र ने बताया कि ट्रैक्टर का चालक बहुत तेज चला रहा था, उसे कई बार मना किया था। अचानक भैंस काल बनकर सामने आ गई। जिसमें हमारे चार लोगों की मौत हो गई है, 12 से 15 घायल हैं।
विधायक ने की चार लाख की घोषणा
घटना का पता चलते ही भितरवार विधायक मोहन सिंह राठौर अस्पताल पहुंचे हैं। मोहन सिंह राठौर ने कहा है कि सभी घायलों का बेहतर इलाज हो, इसके लिए डॉक्टर को निर्देश दिए गए हैं। सभी मृतकों को शासन से चार-चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही घायलों का इलाज कराया जा रहा है। अपनी विधायक निधि से भी आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार को दी जाएगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *