रबी फसल की गिरदावरी अब किसान खुद करेंगे:डिजिटल ऐप ‘राज किसान गिरदावरी’ से प्रक्रिया हुई आसान

डीडवाना-कुचामन जिले के किसानों के लिए रबी फसल की गिरदावरी प्रक्रिया को इस बार पूरी तरह डिजिटल और सुविधाजनक बनाया गया है। राज्य सरकार ने “किसान स्वयं गिरदावरी” व्यवस्था लागू करते हुए डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) के तहत 1 जनवरी 2026 से अभियान शुरू किया है। अब काश्तकार “राज किसान गिरदावरी” मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी फसल का विवरण स्वयं दर्ज कर सकते हैं। इस नई व्यवस्था से पटवारी पर निर्भरता कम होगी और वास्तविक फसल का सटीक आकलन संभव हो सकेगा। गिरदावरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सुविधाजनक बनाया
भू-अभिलेख निरीक्षक कपिल देव शर्मा ने प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान गूगल प्ले स्टोर से “राज किसान गिरदावरी” ऐप डाउनलोड कर मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। ऐप में “फसल विवरण जोड़ें” विकल्प चुनते ही मैप खुल जाता है, जो किसान की वर्तमान लोकेशन के आधार पर संबंधित खसरा नंबर दिखाता है। किसान को सही खसरा चुनकर फसल की जानकारी भरनी होती है, फसल की स्पष्ट फोटो अपलोड करनी होती है और अंत में अपनी सेल्फी के माध्यम से पुष्टि करनी होती है। सबमिट करने के बाद पंजीकरण संख्या प्राप्त होती है तथा गिरदावरी की ई-साइन बारकोड नकल ऐप से निःशुल्क मिल जाती है, जो सभी सरकारी कार्यालयों में मान्य होगी। कलेक्टर ने किसानों से की अपील
जिला कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत ने किसानों से अधिकाधिक संख्या में इस सुविधा का उपयोग कर स्वयं गिरदावरी करने की अपील की है, ताकि कार्य समय पर पूर्ण हो सके। अतिरिक्त जिला कलेक्टर मोहनलाल खटनावलिया ने बताया कि पिछले सीजन की तरह इस बार भी किसानों की सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है। प्रशासन ने गिरदावरी के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। एक खाते में एक से अधिक खातेदार होने पर कोई भी एक व्यक्ति गिरदावरी कर सकता है। एक खसरे में कई फसलें होने पर सभी का विवरण एक साथ भरना जरूरी है। यदि खेत में फसल नहीं है तो “निल फसल” विकल्प चुनकर फोटो सहित प्रविष्टि करनी होगी। गिरदावरी खेत पर खड़े होकर ही करनी है और सबमिट से पहले सभी विवरण सावधानी से जांचना आवश्यक है, क्योंकि बाद में संशोधन संभव नहीं होगा। किसानों की सुविधा के लिए जिला स्तर पर व्हाट्सएप समूह भी बनाया गया है, जहां तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध रहेगा। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को समय पर लाभ मिल सकेगा।

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