रमजान के दूसरे जुम्मे पर शहर की मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे, सजदे में झुके सिर

भास्कर न्यूज | जालंधर रमजान का पवित्र महीना जारी है। शनिवार को रमजान का 10वां रोजा रखा जाएगा, जो तीन अशरों में पहले अशरे का आखिरी दिन होगा। रविवार से दूसरा अशरा शुरू होगा। 11 से 20 रमजान का समय गुनाहों की माफी मांगने का माना जाता है। इस्लाम धर्म के अनुसार, यदि बंदा सच्चे दिल से दुआ करे और तौबा करे तो अल्लाह उसके गुनाह माफ करता है। रमजान का पहला अशरा 1 से 10 रोजों तक रहमत का होता है। तीसरा अशरा 21 से 30 रोजों तक जहन्नम से निजात का माना जाता है। इसी दौरान शब-ए-कद्र (लैलतुल कद्र) की पवित्र रात भी आती है, जिसे सबसे अहम रात माना गया है। रमजान के दूसरे जुम्मे पर शहर की मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे। सुन्नी शाही जामा मस्जिद, इमाम नासिर मस्जिद, बिलाल मस्जिद और बूटा मंडी मस्जिद सहित अन्य मस्जिदों में हजारों लोगों ने नमाज अदा की। नमाज से पूर्व इमामों ने धार्मिक उपदेश दिए। नमाज के उपरांत देश में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी सौहार्द के लिए सामूहिक दुआ की गई। बाद में लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर जुमे की मुबारकबाद दी। ^ मुस्लिम संगठन पंजाब के प्रधान एडवोकेट नईम खान ने बताया रमजान का हर दिन बड़ा ही कीमती व पवित्र है। इस पाक महीन में दुआओं का असर 70 गुणा तक बढ़ जाता है। पवित्र दिनों में भूखे रहने से गरीबों के दुख-दर्द को समझने का अनुभव मिलता है। कुरान में लिखा है कि संपत्ति का 2.5 प्रतिशत हिस्सा जकात करना जरूरी है। बिना इसके ईद की नमाज पूरी नहीं मानी जाती है।

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