रमजान माह के पहले जुमे की नमाज शुक्रवार को डीडवाना के निकटवर्ती ग्राम शेरानी आबाद सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिदों में पहुंचे और देश में अमन-चैन, खुशहाली तथा भाईचारे के लिए दुआएं मांगीं। जामा मस्जिद में मौलाना अब्दुल हकीम ने तकरीर करते हुए रमजान माह की फजीलत बयान की। उन्होंने बताया कि इस पवित्र महीने में हर फर्ज नमाज का सवाब 70 गुना तक बढ़ा दिया जाता है, इसलिए अधिक से अधिक इबादत कर अल्लाह को राजी करने का प्रयास करना चाहिए। मौलाना हकीम ने लोगों से अपील की कि रमजान में गरीब और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि रोजेदारों को इफ्तार करवाने, मुसाफिरों और मेहमानों के लिए सेहरी व इफ्तार का इंतजाम करने से सवाब में इजाफा होता है। तकरीर के दौरान रमजान के तीन अशरों की अहमियत भी समझाई गई। बताया गया कि रमजान का पहला अशरा रहमत का, दूसरा बरकत का और तीसरा मगफिरत का होता है। इन दिनों में अल्लाह से रहमत, बरकत और मगफिरत की दुआ मांगने की खास अहमियत है। जामा मस्जिद के अलावा मक्का मस्जिद, मदीना मस्जिद, नूरी मस्जिद, गौसिया मस्जिद, कंजुल ईमान मस्जिद तथा खिजरपुरा, हमीरपुर और डूंगरी क्षेत्रों की मस्जिदों में भी जुमे की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद खुतबा पढ़ा गया और देश में शांति, सद्भाव और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं की गईं। रमजान के पहले जुमे पर पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला।


