अलवर के खेड़ली में तस्कर तेज रफ्तार में दौड़ रही पिकअप से 6 गायों को रोड पर फेंक दिया। जिनके पैर व मुंह भी रस्से से बंधे थे। रोड पर बदहाल मिली गायों की हालत देखी नहीं गई। यह घटना रविवार रात करीब 12 बजे की है। गोतस्करों का पीछा किया तो तस्करों ने बचने के लिए चलती पिकअप से गोवंश केा रोड पर फेंकते गए। जिससे उनके पैर, मुंह, पीठ पूरा शरीर घाव में तब्दील हो गया। गोरक्षकों ने अलाव तपाकर रात भर गायों की सेवा की। सुबह इलाज के लिए भेजा। तस्कर पहाड़ी पर चढ़कर फरार हो गए। अलवर के गोरक्ष सागर से जानिए पूरी दर्दनाक कहानी…. गोरक्षक सागर ने बताया कि रविवार रात करीब साढ़े 11 बजे पता चला कि खेड़ली से गोवंश को उठाकर पिकअप में भरा गया है। पता चलते ही टीम गोतस्करों का पीछा करने निकली। गोवंश को खेड़ली में जीएस स्कूल के आसपास से भरा था। उनके हाथ-पैर व मुंह बांधे हुए थे। गोरक्षक आगे निकल लक्ष्मणगढ़ के धोलागढ़ में रोउ पर कांटा लगा पिकअप को पैंक्चर किया। टायर पैंक्चर हो गया। लेकिन तस्करों ने पिकअप को नहीं रोका। वे पिकअप को लीली गांव की तरफ से लेकर गए। लेकिन पिकअप का पूरा टायर जल गया और गाड़ी रिम पर चल रही थी। यह देख तस्करों ने चलती पिकअप से रस्सों से बंधी गायों को धक्के देकर नीचे फेंकते गए। जिससे गायों की बुरी हालत हो गए। आगे तस्कर मकरेटा की पहाड़ी तक चढ़ गए। वहां पिकअप को खड़ी कर खुद भाग गए। करीब 17 किलोमीटर तक तस्करों ने पिकअप को रिम पर दौड़ाया। जिससे बड़ा एक्सीडेंट होने का डर भी रहा। पिकअप में पांच तस्कर थे। सब फरार हो गए। बााद में गोरक्षकों ने बंधी गायों को खोला। उसके बाद आसपास अलाव लगाई। ताकि गायों को दर्द से थोड़ी राहत मिले। पूरी रात गाय दर्द में परेशानी रही। सुबह उनको अस्पताल भेजा। गोरक्षक टी में सागर तिवारी, सोनू बाबू, चंदू मीणा, हेमंत सैनी व सन्नी सहित धोलागढ़ की टीम शामिल रही। सबने कहा कि एक दिन पहले भी खेड़ली में भी गोवंश पकड़ा था। तस्कर कांच की बोतल व पत्थर लेकर चलते हैं। बोतल फेंकते हैं। इसलिए बचाव करना मुश्किल हो जाता है। फिर भी जान जोखिम में डालकर गायों की सेवा करने का प्रयास करते हैं।


