मधुकम खादगढ़ा स्थित शिव दुर्गा मंदिर लेन में आदिवासी जमीन पर पिछले 40 वर्षों से घर बनाकर रह रहे 13 परिवार एक झटके में बेघर हो गए। हाईकोर्ट आैर एसएआर कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने इस जमीन पर बने घरों पर बुलडोजर चला दिया। सुबह 9 बजे पुलिस और पांच बुलडोजर के साथ प्रशासन की टीम सुखदेव नगर थाना पहुंच गई थी। जैसे ही जिला प्रशासन की आेर से सभी मकान मालिकों को घर खाली करके बाहर निकलने का एनाउंसमेंट किया गया, वहां मौजूद लोग आक्रोशित हो गए। धक्का-मुक्की हुई। पुलिस को भारी पड़ता देख मुहल्ले के लोग आंखों में आंसू लेकर पीछे लौट गए। चारों आेर चीख-पुकार मच गई। फिर मजिस्ट्रेट ने मकानों को तोड़ने का निर्देश दे दिया। सभी घरों के सामने का हिस्सा ध्वस्त हो गया। प्रशासन ने बुधवार सुबह 10 बजे तक घर खाली करने का निर्देश दिया है। पहले जनरल व्यक्ति ने बेची थी जमीन, रजिस्ट्री भी हुई थी महावीर उरांव से पहले जनरल व्यक्ति ने यह जमीन बेची थी। इसकी रजिस्ट्री भी कराई गई। इसके बाद महावीर ने आदिवासी जमीन होने का दावा करते हुए केस किया। जमीन मालिक आैर जमीन दलालों ने मिलकर भवन मालिकों से दुबारा एक करोड़ से अधिक राशि वसूल की। पैसा लेने के बाद अवैध तरीके से एग्रीमेंट भी तैयार किया गया कि वह जमीन वापस नहीं लेगा। इसके बाद भी केस कर दिया। सभी परिवारों ने ली थी दो-तीन कट्ठा जमीन: नारायण साव, प्रमोद साव सहित कुल 13 लोगों के पूर्वजों ने 1980 से 1985 के बीच 2 से 3 कट्ठा प्रति परिवार जमीन की खरीदारी की थी। इसके बाद खतियानी जमीन मालिक महादेव उरांव ने 1992 में सिविल कोर्ट में केस किया। इसमें वह हार गया। इसके बाद 1993 में एसएआर कोर्ट में जमीन वापसी के लिए केस किया। यहां से उसके पक्ष में फैसला आया। 1997 में हाईकोर्ट पहुंचा मामला: महादेव उरांव ने 1997 में हाईकोर्ट में केस किया आैर सिविल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। हाईकोर्ट में जमीन खरीदारों में से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। हाईकोर्ट में सुनवाई से संबंधित नोटिस भी नहीं मिला। इस वजह से कोर्ट से एकतरफा फैसला महादेव उरांव के पक्ष में हो गया। महादेव उरांव ने फिर वसूल लिए 1 करोड़ रुपए: हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने दखल-दिहानी की कार्रवाई नहीं की। इस दौरान महादेव ने खरीदारों से समझौता किया। इसके बाद 5.25 लाख रु. कट्ठा की दर से मुआवजे पर डील हुई। महादेव उरांव को 11 लोगों ने एक करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान िकया। इस लेनदेन का एग्रीमेंट तैयार किया गया। फिर अवमानना की याचिका दायर कर दी।


