राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट सब्मिट में बतौर स्टेट गेस्ट हिस्सा लेने जयपुर पहुंचे डॉयचे बैंक डायरेक्टर पंकज ओझा ने कहा- राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में हुए 35% MOU धरातल पर पूरे होना सरकार के लिए बहुत बड़ा अचीवमेंट होगा। क्योंकि पूर्व सरकार के वक्त में हुए MOU अब तक 10 से 15% तक ही पहुंच पाए हैं। उन्होंने कहा- राजस्थान में अधिकारी बदलने की वजह से पूरा प्रोजेक्ट अटक जाता है। नए अधिकारी आने से इन्वेस्टर को फिर से नई शुरुआत करनी पड़ती है। प्रदेश सरकार को इस प्रक्रिया में बदलना चाहिए। पढ़िए पंकज ओझा के साथ दैनिक भास्कर की खास बातचीत… सावल – राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में हिस्सा लेने के लिए आप अमेरिका से राजस्थान आए हैं। इस समिट में कैसा एक्सपीरिएंस रहा? जवाब – राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में हिस्सा लेने का मेरा एक्सपीरियंस बहुत पॉजिटिव रहा है। दुनियाभर से जयपुर पहुंचे निवेशकों में एक उत्साह था। ब्यूरोक्रेसी से लेकर लीडरशिप तक सभी ने बहुत अच्छे से मैनेजमेंट कर एक मैसेज दिया कि हम राजस्थान को नेक्स्ट लेवल पर ले जाना चाहते हैं। जयपुर की हॉस्पिटैलिटी से लेकर यहां के कलर राजस्थान के हेरिटेज सब ने मुझे बहुत अट्रैक्ट किया है। इसे कभी नहीं भुलाया जा सकता है। सवाल – राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के तहत अब तक 35 लाख करोड़ के MOU हो चुके हैं। यह धरातल पर इंप्लिमेंट कैसे होंगे। बतौर बैंकर इस पर आपका क्या सोचना है? जवाब – इन्वेस्टर को सबसे पहले एक अपॉर्चुनिटी दिखाई जाती है। रिस्क को एनालाइज करने का काम अलग- अलग कंपनी और बैंकर्स द्वारा किया जाता है। जो यह पता करते हैं कि वहां पर जो प्रोजेक्ट लगने वाला हैं। वह फायदेमंद है या नहीं है। उसका एनालिसिस किया जाता है। इसके बहुत अलग – अलग फ्रेमवर्क होते हैं। इसे जांचने के बाद इन्वेस्टर्स को बैंक पैसा देता है। इसे जमीन पर उतारने के लिए फाइल आगे चलती है। यह पूरी प्रक्रिया एक धीमी प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ती है। जो मुझे लगता है, राजस्थान सरकार के लिए भी लर्निंग एक्सपीरिएंस है। इससे पहले भी राजस्थान में इस तरह की दो से तीन इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन हो चुका है। जहां के नंबर इतने अच्छे नहीं थे। इससे मौजूदा सरकार ने सीख लेकर राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया है। मुझे लगता है इस समिट से भी सरकार काफी कुछ सीखेंगी। पहले की समिट के वक्त जो प्रोजेक्ट और MOU थे। वह 10 से 15% तक ही धरातल पर आए होंगे। मौजूदा सरकार कोशिश करेगी कि इस बार के प्रोजेक्ट्स (MOU) को 30 से 35% तक धरातल पर लाया जा सके। अगर इससे ज्यादा 40% तक भी पहुंच जाएंगे। यह मौजूदा सरकार के लिए एक बड़ा अचीवमेंट होगा। मुझे लगता है कि इन्वेस्टमेंट की यह प्रक्रिया एक धीमा लर्निंग एक्सपीरियंस है। इसमें लोकल रिस्क से लेकर पॉलिसी स्तर तक के जो भी गैप होते हैं। उसमें धीरे – धीरे सुधार करते हुए राज्य आगे बढ़ते हैं। वैसे भी एग्रीमेंट में निवेशक यही बताता है कि इस प्रोजेक्ट में मैं पैसा लगाना चाहता हूं। मेरा मानना है कि इन्वेस्टर को पता होता है कि इस प्रोजेक्ट में पैसा लगाना है। वह यह भी जानता है कि यह अच्छी जगह है। धरातल पर काफी लोकल इशू होते हैं। काफी पॉलिसी इशू होते हैं। जैसे-जैसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ते हैं। तब जाकर इन्वेस्टर को समझ में आता हैं। सिर्फ राजस्थान या भारत में ही नहीं बल्कि, पूरी दुनिया में इसी तरह से यह प्रक्रिया चलती है। इसकी वजह से इन्वेस्टमेंट सब्मिट के MOU (प्रोजेक्ट्स) 100% तक धरातल पर नहीं पहुंच पाते हैं। सवाल – आपको क्या लगता है, राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में राजस्थान सरकार द्वारा किए गए 35 लाख करोड़ के MOU 100% तक धरातल पर नहीं उतर पाएंगे? जवाब – 100% तक MOU को धरातल पर लाना नामुमकिन नहीं है, लेकिन इतना आसान भी नहीं है। पॉजिटिव सोच के साथ काम किया जाए तो भी सभी को पता है कि इन्वेस्टर के लिए धरातल पर काम करना इतना आसान नहीं होता है। अगर सिर्फ कागजी कार्रवाई हो तो यह पूरी प्रक्रिया बहुत आसान होती। जो एक सेकेंड में भी पूरी हो सकती थी। हकीकत में ऐसा नहीं होता है। राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है। प्रदेश में तीसरी बार ही इस तरह की इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन हो रहा है। पॉलिसी पर बहुत अच्छा काम किया जा रहा है। लीडरशिप पूरी तरह पॉजिटिव है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपने पहले ही साल में इस तरह की इन्वेस्टमेंट समिट कर एग्रेसिव होकर काम कर रहे हैं। वह 100% MOU को धरातल पर लाना चाहते हैं। दुनियाभर में इस तरह के इन्वेस्टमेंट सब्मिट में हुए अधिकतम MOU के धरातल पर आने का जो प्रतिशत है। वह अधिकतम 40 से 50% ही रहा है। सवाल – राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का 2 साल बाद फिर से आयोजन होगा। ऐसे में मौजूद MOU कब तक धरातल पर पूरे हो जाने चाहिए। इन्वेस्टर में राजस्थान में निवेश को लेकर विश्वास पैदा हो सके? जवाब – मुझे लगता है हर प्रोजेक्ट ही अपनी लाइफ होती है। कुछ प्रोजेक्ट ऐसे होते हैं। जो 3 महीने में भी धरातल पर दिखने लगते हैं। कुछ प्रोजेक्ट ऐसे होते हैं, जिनको धरातल पर आने में एक, डेढ़ या फिर 2 साल तक का वक्त भी लग जाता है। ऐसे में मौजूदा सरकार ने जो 2 साल बाद फिर से समिट करने का फैसला किया है। यह बहुत सही निर्णय है। ताकि सरकार अपने 2 साल के कार्यकाल में मौजूदा MOU को रिव्यू कर अपनी नई जर्नी को शुरू कर सकती हैं। हालांकि मुझे लगता है, मुख्यमंत्री भजनलाल जी जिस शिद्दत के साथ काम कर रहे हैं। वह राजस्थान में 100% तक MOU धरातल पर लाना चाहते हैं। सवाल – राजस्थान में निवेश के दौरान इन्वेस्टर्स को सबसे ज्यादा क्या और किस तरह की समस्या आती है। इससे वह प्रदेश में निवेश नहीं करते है? जवाब – राजस्थान में अगर किसी को पता होता कि कौनसी नीति निवेशकों को परेशान करती है। अब तक की सरकार या मौजूदा मुख्यमंत्री भी सबसे पहले उस समस्या का समाधान कर चुके होते। हकीकत में ऐसा नहीं होता है। क्योंकि हर बार की समस्या अलग – अलग तरह की होती है। हर बार नया एक्सपीरियंस होता है। कई बार कागजों में और टेक्निकल चीजों में कमी रह जाती है। मुझे लगता है। उसमें सामंजस्य और बेहतर होना चाहिए। राजस्थान में आमतौर पर देखा जाता है कि जो निवेशकों से बात करने वाले अधिकारी (IAS) होते हैं। उनका ट्रांसफर हो जाता है। फिर नया अधिकारी उस प्रोजेक्ट पर शुरू से काम करता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। सरकार को इससे सीखकर एक अधिकारी को परमानेंट उस प्रोजेक्ट पर लगाना चाहिए। ताकि उसका रिजल्ट एक निश्चित समय में आ सके और वह पूरा प्रोजेक्ट धरातल पर जल्द से जल्द पूरा हो सके। सामान्य शब्दों में कहें तो किसी एक कंट्री के लिए एक IAS अधिकारी की नियुक्ति कर देनी चाहिए। वह लोकल इशू से लेकर पॉलिसी स्तर तक के जो भी मामले हैं। उनका त्वरित समाधान कर निवेशक को प्रोजेक्ट धरालत पर पूरा करने में मदद करें। अगर सरकार इस तरह काम करेगी। मुझे लगता है कि और ज्यादा बेहतर रिजल्ट आने की पूरी संभावना है। सवाल – डॉयचे बैंक राजस्थान में कौनसे प्रोजेक्ट में निवेश करने जा रहा है। किन – किन निवेशकों के साथ आप आने वाले दिनों में राजस्थान में काम करेंगे? जवाब – हमारे बैंक का काम पार्टनर की स्ट्रैटेजी से लेकर उसके लिए एडवाइजरी बनाने तक का है। ग्लोबली हम बहुत से इन्वेस्टर के साथ काम कर रहे हैं। वैसे भी जो इन्वेस्टर हैं, हम उनके साथ बैठेंगे बात करेंगे। इंटरेस्ट रेट से लेकर प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी से लेकर बहुत से फैक्टर को चैक करेंगे। उसके बाद एक फ्रेमवर्क के थ्रू पूरा काम किया जाएगा। उसके बाद ही यह फैसला होता है कि उस प्रोजेक्ट में कितनी रिक्स है। उसे लोन दिया भी जा सकता है या नहीं दिया जा सकता है। अगर सब कुछ ठीक रहता है तो उसके बाद में जाकर किसी तरह का कोलैबोरेशन होता है। मौजूदा वक्त में काफी निवेशकों के साथ इस प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया गया है। बता दें कि अमेरिका के फ्लोरिडा में एशिया के सबसे बड़े डॉयचे बैंक के डायरेक्टर पंकज ओझा राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट सब्मिट में हिस्सा लेने के लिए जयपुर पहुंचे थे। जहां राज्य सरकार ने उन्हें स्टेट गेस्ट का दर्जा भी दिया है। पंकज ओझा मूल रूप से बीकानेर के गंगाशहर के रहने वाले हैं। जो वर्तमान में फ्लोरिडा में रहते हैं।


