ईसाई धर्म में राख बुधवार से 40 दिन का पवित्र चालीसा काल शुरू हो गया है। इस दौरान श्रद्धालु प्रार्थना, उपवास और परोपकार के माध्यम से ईश्वर की भक्ति करेंगे। इस दौरान शहर के सभी प्रमुख गिरजाघरों में पवित्र मिस्सा का आयोजन किया गया। पुरोहितों ने श्रद्धालुओं के माथे पर राख से क्रूस का चिह्न बनाया। इस दौरान उन्होंने बाइबल का वचन दोहराया – “तुम मिट्टी हो और मिट्टी में ही मिल जाओगे।” राख बुधवार का महत्व राख, पवित्र खजूर की उन डालियों से तैयार की जाती है, जिनका उपयोग पाम संडे के दौरान किया गया था। यह दिन यीशू मसीह के 40 दिन के उपवास और प्रार्थना की याद दिलाता है, जिसे ख्रीस्त अनुयायी आत्मसंयम और आध्यात्मिक नवीनीकरण की प्रक्रिया के रूप में मानते हैं। चालीसाका- सेवा और भक्ति का समय संत हिरदाराम नगर स्थित क्राइस्ट द किंग चर्च में आर्चबिशप डॉ. ए.ए.एस. दुरईराज एसवीडी ने प्रार्थना का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, “रोजमर्रा की व्यस्तता के बीच यह समय हमें प्रार्थना, उपवास और जरूरतमंदों की सेवा में समर्पित होने का अवसर देता है।” फा. अल्फ्रेड डिसूजा (पी.आर.ओ) ने बताया कि “राख बुधवार से शुरू होकर 40 दिनों तक हर बुधवार और शुक्रवार को चर्चों में क्रूस यात्रा आयोजित की जाएगी। इस वर्ष गुड फ्राइडे 18 अप्रैल को और ईस्टर पर्व 20 अप्रैल को मनाया जाएगा।” सेंट जोसफ चर्च के फादर ईश्वरदास मिंज, पैरिश प्रीस्ट, सेंट जोसफ चर्च, बरखेड़ा ने कहा, “इस अवधि में हम चर्च के सदस्यों के साथ मिलकर जरूरतमंदों की सहायता करने का विशेष प्रयास करते हैं।”


