राजधानी में लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या:वॉल्यूम ट्रैफिक सिस्टम फेल… संख्या कम होने पर भी डेढ़ मिनट तक सिग्नल पर खड़ी हो रहीं गाड़ियां

राजधानी में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के दबाव के चलते शहर के कई चौक-चौराहों पर जाम की स्थिति बनती रहती है। इसी दबाव को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 2019 में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) की शुरुआत की गई थी। इसके तहत कैमरे और सेंसर से लैस वॉल्यूम एक्चुएटेड ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। इस सिस्टम का उद्देश्य यह था कि सिग्नल पर वाहनों का दबाव अधिक होने पर ग्रीन सिग्नल का समय अपने आप बढ़ जाए और वाहनों की संख्या कम होने पर रेड सिग्नल की अवधि स्वतः कम हो जाए। लेकिन वर्तमान में यह स्वचालित प्रणाली प्रभावी रूप से काम नहीं कर पा रही है। जहां वाहनों का दबाव अधिक है, वहां भी यात्रियों को डेढ़ मिनट से अधिक समय तक सिग्नल पर रुकना पड़ रहा है। वहीं जिन सिग्नलों पर वाहनों की संख्या कम है, वहां भी उतनी ही देर तक इंतजार करना पड़ रहा है। शहर के जयस्तंभ चौक, शारदा चौक और शास्त्री चौक सहित अन्य प्रमुख सिग्नलों पर सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक पीक आवर्स में ट्रैफिक का दबाव बना रहता है। इन स्थानों पर दैनिक भास्कर की टीम ने स्थिति का जायजा लिया।
जयस्तंभ चौक
समय सुबह 10.30 बजे। चौराहे के चारों स्टॉपर पर वाहनों का भारी दबाव था। सबसे अधिक दबाव शास्त्री चौक की ओर जाने वाले वाहनों का था। शारदा चौक और जयस्तंभ चौक के बीच का पूरा मार्ग वाहनों से भरा हुआ था। 100 सेकेंड के रेड सिग्नल के बाद 100 सेकेंड का ही ग्रीन सिग्नल मिला। यह समय इतना कम था कि आधे से भी कम वाहन ही ग्रीन सिग्नल में चौराहा पार कर सके। शारदा चौक
समय सुबह 11 बजे। पीक आवर के कारण आजाद चौक की ओर से आने वाले वाहनों का भारी दबाव था। यहां 90 सेकेंड के रेड सिग्नल के बाद 90 सेकेंड का ही ग्रीन सिग्नल मिला। सभी वाहन तो पार हो गए, लेकिन इससे पहले ही चौराहे पर जाम की स्थिति बन गई। इसकी वजह यह रही कि जयस्तंभ चौक का सिग्नल शारदा चौक के ट्रैफिक को सीधे प्रभावित करता है। शास्त्री चौक समय दोपहर 12.30 बजे। यहां मोतीबाग, तेलीबांधा और रेलवे स्टेशन की ओर से आने वाले वाहनों का दबाव बहुत अधिक था। सभी लेन में वाहनों को करीब डेढ़ मिनट तक रुकना पड़ा। जयस्तंभ चौक की ओर से आने वाले वाहनों का दबाव अपेक्षाकृत कम था। यह स्टॉपर डेढ़ मिनट के आधे समय में ही खाली हो गया, लेकिन इसके बावजूद उस लेन में ग्रीन सिग्नल चलता रहा। जबकि वाहन नहीं होने की स्थिति में रेड सिग्नल कर अन्य लेन को ग्रीन सिग्नल मिलना चाहिए था। 160 करोड़ से तैयार किया गया सिस्टम
वर्ष 2019 में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की शुरुआत की गई थी। इस पर करीब 160 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसके तहत शहर के 40 स्थानों पर स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, 372 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 23 स्थानों पर रेड लाइट उल्लंघन डिटेक्शन डिवाइस लगाए गए हैं। तकनीकी खामी हो सकती है, जांच कराएंगे
वॉल्यूम एक्चुएटेड सिग्नल सिस्टम चालू है और वाहनों के दबाव के अनुसार सिग्नल स्वचालित रूप से संचालित होते हैं। कई बार अत्यधिक ट्रैफिक होने पर सिग्नल को मैनुअल मोड में रखकर एक ही टाइमर सेट कर दिया जाता है। फिलहाल स्वचालित सिग्नल सिस्टम ही संचालित है। यदि कहीं समस्या है तो यह तकनीकी खामी हो सकती है, जिसकी जांच कराई जाएगी।
– सतीश सिंह, सहायक पुलिस आयुक्त यातायात

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