राजनगर पीएचसी: इमारत आलीशान, इलाज अब भी भगवान के नाम!

राजनगर पीएचसी: इमारत आलीशान, इलाज अब भी भगवान के नाम!

राजनगर । घोषणा 2022 में हो गई थी, लोकार्पण 2024 में हुआ और स्वास्थ्य सेवा? वह अब भी भविष्य के गर्भ में है। राजनगर उप-स्वास्थ्य केंद्र को तीन वर्ष पहले ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) घोषित कर दिया गया था, लेकिन सुविधाएं आज भी उस ज़माने में अटकी हैं जब बीमारियाँ झाड़-फूंक से ठीक मानी जाती थीं।‌ बाहर से देखो तो लगता है एम्स की कोई सैटेलाइट ब्रांच खुल गई हो, लेकिन भीतर झांको तो समझ आ जाएगा यहाँ इलाज नहीं, केवल उद्घाटन हुआ है। भवन की सुंदरता पर मोहित मत होइए, यह वह मंदिर है जहाँ न पुजारी है, न प्रसाद। केवल घंटा बजता है वह भी उपेक्षा का।

चार लोगों की ड्यूटी में चौदह की उम्मीद — बाकी सब ‘रामभरोसे चिकित्सा योजना’

सरकारी मानदंडों के अनुसार, एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कम से कम 14 से 15 कर्मचारी आवश्यक होते हैं डॉक्टर, फार्मासिस्ट, ड्रेसर, लैब टेक्नीशियन, गार्ड, सफाईकर्मी और बाकी सहयोगी स्टाफ सहित।
राजनगर PHC में नियुक्त हैं कुल 4 कर्मी दो एएनएम और दो नर्सिंग स्टाफ।‌ डॉक्टर? नहीं हैं।
फार्मासिस्ट? नहीं हैं।
ड्रेसर? कागजों में पदस्थ हैं, लेकिन बिजुरी में सेवा दे रहे हैं 

स्वास्थ्य केंद्र है या कोई “सूत्रलेख रहित स्कीम”, जहाँ इलाज खुद से सोचकर ही कर लेना पड़ता है!
मरीजों का इलाज कुछ यूं होता है — “नाम लिखवाया, बुखार को मानसिक शांति से दबाइए, और दुआ करिए कि खुद ही ठीक हो जाएं।” राजनगर PHC अब इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि आत्म-संयम प्रशिक्षण केंद्र बन गया है। ड्रेसर? कागजों में पदस्थ हैं, लेकिन बिजुरी में सेवा दे रहे हैं और अभी तक रिलीविंग ऑर्डर नहीं आया।
लैब टेक्नीशियन? ग़ायब।  

सुरक्षा और सफाई भी बीमार — एक गार्ड, एक सफाईकर्मी और दोनों का बोझ आसमान छूता

जहाँ दो-दो गार्ड होने चाहिए, वहाँ केवल एक नाइट शिफ्ट गार्ड है। लगता है सरकार को पूरा भरोसा है कि दिन में चोर नहीं आते, और बीमारियां रात में ही हमला करती हैं।
सफाई की बात करें तो एक मात्र सफाईकर्मी पूरे परिसर की सफाई का जिम्मा अकेले उठाए हुए है। परिणामस्वरूप, सफाई व्यवस्था की हालत देखकर लगता है कि सरकार का मानना है “गंदगी भी इम्युनिटी बढ़ाती है।”

पोस्टमार्टम और मेडिकल परीक्षण के नाम पर परिक्रमा — दो किलोमीटर वाला थाना, नौ किलोमीटर की सजा

राजनगर थाना महज़ 2 किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन किसी भी हादसे के बाद पोस्टमार्टम के लिए 9 किलोमीटर दूर बिजुरी भेजा जाता है।
यह व्यवस्था प्रशासन की सुविधा नहीं, संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुकी है।
इतना ही नहीं, झगड़े-झंझट या अपराधों में घायल पीड़ितों के “मेडिकल परीक्षण” के लिए भी पुलिस को इसी दूरस्थ केंद्र का चक्कर लगाना पड़ता है।‌ यानी जीवित हो या मृत  दोनों के लिए यह केंद्र समान रूप से अनुपयोगी है। राजनगर PHC अब एक “कानूनी बाध्यता केंद्र” बन गया है  जहाँ सिर्फ़ लिखा है कि “है”, मगर हकीकत में “नहीं है”।

तीन नगर परिषद और आठ गांवों की उम्मीद — 50,000 लोगों के स्वास्थ्य की डूबती नाव

इस PHC का महत्व केवल राजनगर तक सीमित नहीं है। तीन नगर परिषद और करीब आठ गांव इसकी सेवाओं पर आश्रित हैं। यदि इसे सही संसाधनों, स्थायी स्टाफ और उचित दवाओं से सुसज्जित कर दिया जाए, तो यह केंद्र लगभग 50,000 लोगों के लिए स्वास्थ्य का वरदान बन सकता है। लेकिन मौजूदा हालातों में यह एक ऐसा महल है, जिसकी दीवारें मजबूत हैं, पर भीतर खालीपन की गूंज है।

जनता का सवाल — कब मिलेगा इलाज की गारंटी, सिर्फ़ कागज़ की नहीं?

राजनगर की जनता पूछ रही है कि जो 2022 में इसे PHC घोषित किया गया था, तब योजना कहाँ अटक गई?जब उद्घाटन हो गया, तो ऑपरेशन कब शुरू होगा? जब कागज़ों में स्टाफ भर दिए गए, तो धरातल पर क्यों नहीं दिखाते? इस वक्त राजनगर PHC एक प्रतीक है उस सरकारी रवैये का, जहाँ घोषणा सबसे पहले होती है, व्यवस्था सबसे बाद में और सुविधा शायद कभी नहीं।

इनका कहना है 

डॉक्टर एवं स्टाफ के संबंध में उच्च अधिकारी को पत्राचार किया गया है !

मनोज सिंह
चिकित्सा अधिकारी

जो पहले डॉक्टर पदस्थ थे वह एसईसीएल में ज्वाइन हो गए हैं अभी कोई भी डॉक्टर नहीं है एवं ट्रांसफर लिस्ट में ड्रेसर का पद स्थापना राजनगर कर दिया जाएगा !

डॉ आर के वर्मा
जिला चिकित्सा अधिकारी

इनका कहना है कि
डॉक्टर की कमी से क्षेत्र में मरीजों की समस्या तो बढ़ रही है जिसके लिए हम उच्च अधिकारी को पत्राचार करेंगे कि डॉक्टर एवं उन स्टाफ की पदस्थापना जल्द से जल्द करें

श्रीमति रीनू सुरेश कोल
अध्यक्ष नगर परिषद डोला

 हमारे द्वारा संबंधित अधिकारियों को पत्राचार किया जाएगा ताकि नगर के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सके

यशवंत सिंह
अध्यक्ष नगर परिषद राजनगर

 डॉक्टरों और स्टाफ की कमी से जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । जनहित को देखते हुए मैं शीघ्र ही इस विषय में उच्च अधिकारियों से पत्राचार करूंगा ताकि समस्या का शीघ्र समाधान हो सके।

धनंजय सिंह (मुन्ना)
उपाध्यक्ष नगर परिषद राजनगर

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