प्रदेश के किसी भी वित्त पोषित विश्वविद्यालय में अब कुलगुरु पदनाम के आगे ‘माननीय’ नहीं लिखा जाएगा। राजभवन ने इस संबंध में सख्त परिपत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि कुलगुरु पद संवैधानिक श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उसके साथ ‘माननीय’ शब्द का प्रयोग प्रोटोकॉल के विरुद्ध है। राज्यपाल सचिवालय, लोक भवन से जारी आदेश में कहा गया है कि कई विश्वविद्यालयों में कुलगुरु और कुलसचिव अपने आधिकारिक पत्राचार में कुलगुरु पदनाम से पहले ‘माननीय’ शब्द का उपयोग कर रहे हैं। इस पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति सचिवालय की 9 अक्टूबर 2012 की प्रोटोकॉल प्रैक्टिस का हवाला दिया गया है। इसमें स्पष्ट है कि ‘माननीय’ शब्द का उपयोग केवल ‘राष्ट्रपति’ और ‘गवर्नर’ जैसे संवैधानिक पदों के लिए ही किया जाएगा। सचिवालय ने सभी कुलगुरुओं और कुलसचिवों को निर्देशित किया है कि भविष्य में किसी भी पत्र, आदेश या आधिकारिक दस्तावेज में ‘माननीय’ शब्द का प्रयोग नहीं किया जाए। शान बढ़ाने के लिए माननीय का उपयोग बता दें कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कुलगुरु के पदनाम की शान बढ़ाने के लिए पत्रावलियों, बैठकों के एजेंडे व मिनिट्स में भी रजिस्ट्रार व अन्य अधिकारी माननीय शब्द का उपयोग करते रहे हैं। कई कुलगुरुओं के ऑफिस व कार की पदनाम पट्टिकाओं पर भी माननीय कुलगुरु लिख रखा है।


