राजसमंद के चारभुजा मंदिर में रखी सोने की छड़ी:महीने में एक बार केवल 10 मिनट के लिए होते हैं दर्शन,चांदी की गाय रखी

मेवाड़ के प्रसिद्ध धार्मिक धाम चारभुजा मंदिर में शुक्रवार को आज मासिक ग्वाल झांकी के विशेष दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। यह झांकी प्रत्येक माह में केवल एक बार ही सजाई जाती है, जिसमें श्रद्धालु केवल 10 मिनट के लिए ही दर्शन कर सकते है। ग्वाल झांकी के दौरान चारभुजानाथ प्रभु को सफेद वस्त्रों में ग्वाल वेशभूषा में श्रृंगारित किया जाता है। इस झांकी की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि प्रभु के समक्ष सामान्य रूप से रखी जाने वाली ढाल और तलवार के स्थान पर केवल सोने की छड़ी विराजमान रहती है, जिसे ग्वाल स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। विशेश भोग अर्पित किया इसके साथ ही पाट पर चांदी की गाय सजाई जाती है तथा ठाकुरजी को विशेष भोग अर्पित किया जाता है। झांकी के समय प्रभु के समीप सदैव विराजमान रहने वाले लालजी बावजी को भंडार में चढ़ाया जाता है। करीब 10 मिनट तक ग्वाल झांकी के दर्शन कराने के पश्चात राज श्रृंगार झांकी के दर्शन खोले गए। इसके बाद मंदिर की विधिवत धुलाई कर सेवा दूसरे पुजारी को सौंपी गई। ग्वाल झांकी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। उल्लेखनीय है कि मंदिर में हर माह पूजा सेवा की अवधि पूर्ण होने पर दूसरे पुजारी को सेवा का अवसर दिया जाता है और इसी अवसर पर यह विशेष ग्वाल झांकी सजाई जाती है।

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