राजसमंद के द्वारकाधीश मंदिर में चौरासी खम्भ के दर्शन:पांच रंग की गुलाल से खिलाया फाग, लाल ठाड़े वस्त्रों से सजाया गया

राजसमंद के कांकरोली स्थित द्वारकाधीश मंदिर कांकरोली में आज चौरासी खम्भ के विशेष दर्शन होंगे। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इससे पहले फाल्गुन शुक्ल पक्ष बारस शनिवार को प्रभु द्वारकाधीश का अलौकिक श्रृंगार किया गया और फाग व राल दर्शन हुए। गोवर्धन चैक में राल उड़ाकर भक्तों को दर्शन कराए गए। चौरासी खम्भो का मनोरथ गोकुल स्थित नंद भवन से जुड़ा माना जाता है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपने शुरुआती साढ़े तीन साल बिताए थे। फाल्गुन शुक्ल बारस पर विशेष श्रृंगार शनिवार को फाल्गुन शुक्ल पक्ष बारस के अवसर पर प्रभु द्वारकाधीश का विशेष श्रृंगार किया गया। प्रभु के मस्तक पर चोवा की छज्जेदार तापे सादा चंदिका धारण कराई गई। चोवा को घेरदार वाघा, वैसी सुथन, श्वेत कटि का पटका और लाल ठाड़े वस्त्रों से सजाया गया। सोने के आभूषण, चार कर्णफूल, लाल फरगुल और माला फौंदा के श्रृंगार ने झांकी को आकर्षक बनाया। पांच रंग की गुलाल से फाग इस अवसर पर प्रभु को पांच रंग की गुलाल से फाग खिलाया गया। शयन झांकी में राल के दर्शन हुए, जहां अबीर गुलाल उड़ाई गई। उत्थापन भोग आरती के दौरान भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। गोवर्धन चैक में युवराज गोस्वामी वेदांत कुमार और संजीव कुमार महाराज ने राल उड़ाकर भक्तों को दर्शन कराए। शनिवार को राल दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रभु के दर्शन किए। चौरासी खम्भो का धार्मिक महत्व चौरासी खम्भो में बगीचा का मनोरथ आध्यात्मिक भाव से जुड़ा हुआ है। इसका मूल संबंध गोकुल स्थित नंद भवन से माना जाता है। मान्यता है कि चौरासी खम्भो वाला वह प्राचीन स्थल वही है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के शुरुआती साढ़े तीन साल नंद बाबा के सान्निध्य में बिताए थे। इसी कारण चौरासी खम्भो के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है और श्रद्धालु इसे आस्था से जोड़कर देखते हैं।

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