हेमंत रंगों का पावन पर्व होली न केवल आपसी सौहार्द और खुशियां लेकर आता है, बल्कि यह भारत की विविध संस्कृतियों के अनूठे मिलन का जीवंत उदाहरण भी है। इस वर्ष जालंधर में राजस्थान से आकर बसे परिवारों और स्थानीय संगठनों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए होलिका दहन और धुलेंडी (रंगों की होली) के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में दशकों पुरानी परंपराओं को श्रद्धा और उल्लास के साथ निभाने की तैयारी है। जालंधर के चरणजीतपुरा, खोदियां मोहल्ला, तिलक नगर, जालंधर कैंट, कमल विहार और सैदां गेट जैसे क्षेत्रों में होली का उत्सव एक सामूहिक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है। इन स्थानों पर होने वाली पूजा में भक्त न केवल भाग लेते हैं, बल्कि होलिका दहन के पश्चात उसकी पवित्र राख को घर ले जाते हैं, जिसे सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। समय : शाम 7:30 बजे… राजस्थान से आए हेमंत शर्मा ने बताया कि गुड़ मंडी नजदीक चरणजीतपुरा में लगभग 100 साल से होलिका दहन विधिवत पूजन करके किया जाता है। होलिका दहन का महत्व दादा-परदादा और उनके समाज के लिए बहुत गहरा है। उनके दिखाए व बताए रीति रिवाजों को वे आज भी निभा रहे हैं। इस साल 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। रात 7:30 बजे विधिवत पूजन के साथ अग्नि प्रज्वलित की जाएगी। हेमंत शर्मा के अनुसार राजस्थानी परिवारों में होलिका पूजन के दौरान विशेष पारंपरिक गीत गाए जाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। उन्होंने बताया कि 3 मार्च को ग्रहण होने की वजह से होली 4 मार्च को हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। समय : शाम 6 से 9 बजे… खोदियां मोहल्ला में जीनगर समाज की तरफ से होली उत्सव के रूप में मनाई जाती है। समाज के प्रतिनिधियों, महिंदर पाला और राजू ने बताया कि उनका समाज पिछले 40 साल से लगातार होलिका दहन की परंपरा निभाता आ रहा है। उन्होंने कहा कि 2 मार्च को शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक होलिका दहन की रस्म होगी। श्रद्धालु एकत्रित होकर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाएंगे और 4 मार्च को मुख्य होली यानी रंगों का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन समाज के लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर भाईचारे का संदेश देंगे।


