मिट्टी से आयरन खत्म होने के मामले में राजस्थान दूसरे नंबर पर आ गया है। प्रदेश के 4 जिले में हालात चिंताजनक हैं। जालोर, जोधपुर, पाली और नागौर की मिट्टी में आयरन औसतन 99% तक घट चुका है। इसका असर आयरन का सोर्स वाले अनाज-दालें, सब्जियां व फलों में भी दिख रहा है। पालक-पत्ता गोभी जैसी हरी सब्जियां सफेद पड़ रही हैं। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्रालय की प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के जरिए प्रदेशभर से जुटाए गए सैंपल की जांच के बाद सामने आई है। कंसल्टेंट प्लांट डॉक्टर मिशन (CPDM) के संस्थापक डॉ. प्रकाश गुप्ता ने मिट्टी में घटते आयरन के स्तर की 36 तरह की फसलों पर असर रिसर्च की थी। उन्होंने बताया- भारत की एक चौथाई जमीन से आयरन खत्म हो चुका है। महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक में आधी से ज्यादा जमीन में आयरन नहीं है। राजस्थान की मिट्टी में कम हो रहा आयरन कैसे चिंताजनक है? इसके क्या कारण हैं? इसे ठीक करने के लिए क्या प्रयास जरूरी होंगे? पढ़िए- इस रिपोर्ट में… राजस्थान देश में दूसरे नंबर पर : आंकड़े डराने वाले, असर पड़ना शुरू डॉ. प्रकाश गुप्ता ने बताया कि ये आंकड़े डराने वाले इसलिए हैं क्योंकि इनका बुरा प्रभाव सिर्फ इंसानों पर नहीं बल्कि जानवरों और पूरे पर्यावरण पर पड़ना शुरू हो चुका है। राजस्थान की बात करें तो जालोर, जोधपुर, पाली और नागौर ऐसे जिले हैं जिनकी जमीन से आयरन लगभग-लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। यह आंकड़े मौजूदा साल 2023-24 के हैं। इस आंकड़ों के आधार पर मैंने सीपीडीएम पोर्टल के जरिए यह बताने की कोशिश की है कि मिट्टी का स्वास्थ्य कितनी तेजी से गिर रहा है। आयरन 100 प्रतिशत खत्म होने का मतलब है कि खतरनाक स्थिति से भी नीचे जरूरी तत्वों का पहुंच जाना। इससे पत्तेदार सब्जियों में पोषक तत्व कम हो जाएंगे। उपज कम होगी। भोजन के मटेरियल में आयरन तत्व न के बराबर रह जाएगा। इससे हीमोग्लोबिन की कमी आम बीमारी हो जाएगी। मिट्टी से आयरन खत्म होने का क्या असर? : पौधों में हरापन खत्म हो रहा डॉ. प्रकाश गुप्ता ने बताया कि मिट्टी से आयरन खत्म होने का मतलब क्या है, पहले इसे समझना जरूरी है। जमीन में मौजूद आयरन पौधों में क्लोरोफिल और मनुष्य व जीवों में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आवश्यक तत्व है। मिट्टी में मौजूद आयरन के कारण पौधों में क्लोरोफिल बनता है। ये पौधे चाहे फसल हो, सब्जी हो या फिर जंगल में उगने वाले सामान्य पेड़-पौधे। क्लोरोफिल के कारण पेड़-पौधों में हरापन आता है। आयरन की कमी के कारण अनाज वाले पौधों की बालियां कम हो जाएंगी। फल और सब्जियां की जो पैदावार होगी, उनमें आयरन नहीं होगा। डॉ. गुप्ता ने बताया कि उन्होंने पोर्टल पर जारी हुए मिट्टी में आयरन की कमी के आंकड़ों के बाद 36 तरह की फसलों पर इसका असर पाया है। उनके पत्तों की जांच में भी सामने आया कि आयरन कम है। जैसे- मिट्टी में आयरन की कमी है और आपने वहां पालक या पत्ता गोभी उगाई है तो उस पालक-पत्ता गोभी में आयरन ही नहीं होगा तो वो आपके शरीर में उसकी कमी को पूरा कैसे करेगा। पीएम मृदा हेल्थ कार्ड योजना से मिली जानकारी ये आंकड़े इसलिए सामने आ पाए क्योंकि भारत में प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना चल रही है। इस कार्ड में मिट्टी की गुणवत्ता और कमियों की जानकारी होती है। साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए जाते हैं। 1 इससे पता चलता है कि हमारी जमीन में कौन से और कितने पोषक तत्व मौजूद हैं। साल 2015 को यह योजना राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ से शुरू की गई थी। योजना के तहत देशभर में जमीनों के नमूने जुटाए गए और जांच के बाद इन्हें जारी किया गया। हमने देशभर के आंकड़े जुटाकर कंसल्टेंट प्लान डॉक्टर मिशन पोर्टल पर इन्हें जारी किया। 89 पेज में हमने विस्तार से समझाया है कि यह समस्या क्या है, कितनी गंभीर है और इसके क्या परिणाम होंगे। ……


