राजस्थान के रेगिस्तान में दुश्मन के विमान-ड्रोन पलभर में राख:स्ट्रेला-10 डिफेंस सिस्टम से भारतीय सेना ने उड़ाए; कोणार्क कॉर्प्स का युद्धाभ्यास

राजस्थान के रेतीले धोरों में भारतीय सेना के दुश्मन के विमानों को चुन- चुनकर मार गिराया। भारतीय सेना के स्ट्रेला-10(Strela-10M) एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के विमान और ड्रोन के इंजन से निकलने वाली गर्मी को टारगेट किया। फिर उसका तब तक पीछा किया, जब तक उसे हवा में ही राख नहीं कर दिया। सेना की ‘कोणार्क कॉर्प्स’ के जांबाज ‘डेजर्ट वॉरियर्स’ ने Strela-10M मिसाइल सिस्टम के साथ युद्धाभ्यास किया। जवानों ने साफ संदेश दिया कि अब भारतीय आसमान में परिंदा भी बिना इजाजत के पर नहीं मार सकता है। ‘ब्लेजिंग स्काइज ब्रिगेड’ के इन योद्धाओं ने कठिन परिस्थितियों में हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक उड़ाया और युद्धक तैयारियों को पुख्ता किया। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य कम ऊंचाई पर उड़ने वाले दुश्मन के खतरों को पलभर में नष्ट करने की क्षमता को जांचना था। देखिए- युद्धाभ्यास की तस्वीरें ‘Strela-10M’ यानी चलता-फिरता किला
सेना ने ‘एयर डिफेंस’ की ताकत का प्रदर्शन किया है। सेना के प्रवक्ता के अनुसार- स्ट्रेला-10 की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘इन्फ्रारेड’ सीकर है। इससे निकलने वाली मिसाइल दुश्मन के विमान या ड्रोन के इंजन से निकलने वाली गर्मी को पहचान लेती है। इसके बाद उसे टारगेट पर ले लेती है और फिर हवा में ही उसका पीछा करते हुए उड़ा देती है। अभ्यास के दौरान ‘सटीकता और धैर्य’ का प्रदर्शन करते हुए सैनिकों ने सीधे टारगेट पर निशाना लगाया। स्ट्रेला-10 एक ‘शॉर्ट रेंज’ एयर डिफेंस सिस्टम है। आसान भाषा में कहें तो यह एक चलता-फिरता किला है, जो दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टर और आज के दौर के सबसे बड़े खतरे ‘सुसाइड ड्रोन’ को आसमान में ही खत्म करने के लिए बनाया गया है। यह सिस्टम एक चैन वाले बख्तरबंद वाहन (MT-LB) पर सवार होता है, जो उबड़-खाबड़ रास्तों और रेत के टीलों पर भी पक्की सड़क जितनी तेज रफ्तार से ही दौड़ता है। घुसपैठ को नाकाम करने के लिए युद्धाभ्यास
राजस्थान की सीमा खुली और चुनौतीपूर्ण होती है, जहां दुश्मन के ड्रोन या छोटे विमान कम ऊंचाई पर उड़कर घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में Strela-10M जैसे मोबाइल सिस्टम सेना की पहली रक्षा पंक्ति बनते हैं। यह सिस्टम युद्ध के मैदान में टैंकों और सैनिकों की टुकड़ियों के साथ-साथ चलता है ताकि उन्हें हवाई हमलों से सुरक्षा दे सके। ‘मिशन के लिए हर पल तैयार’
युद्धाभ्यास का नारा “फॉरज्ड फॉर फायरपावर, रेडी फॉर बैटल” रखा गया था। सेना के अधिकारियों के अनुसार- रेगिस्तान की भीषण गर्मी और उड़ती रेत के बीच जिस सटीकता से लक्ष्यों को भेदा गया, उसने सैनिकों के ऊंचे मनोबल को दर्शाया है। भारतीय सेना आधुनिक युद्ध की हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और तकनीकी रूप से सक्षम है। 27 फरवरी से वायु शक्ति की शुरुआत जैसलमेर के पोकरण में 27 फरवरी से 2 साल में एक बार होने वाला युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ भी होगा। इसकी 24 फरवरी को फुल ड्रेस रिहर्सल होगी। मेन इवेंट 27 फरवरी को रहेगा। इस दौरान दुश्मन के ठिकानों का पता लगाना और आर्मी की मदद करते हुए हवाई हमले और बमबारी की प्रैक्टिस की जाएगी। सेना के इस खास युद्धाभ्यास को देखने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह के आने की संभावना है। एयर मार्शल नागेश कपूर ने बताया- इस साल होने वाले अभ्यास में फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन और रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट शामिल होंगे। अभ्यास का उद्देश्य वायुसेना की मारक क्षमता, तकनीक और स्वदेशी हथियारों की भूमिका को दिखाना है। इस अभ्यास में 12 हजार किलो बारूद बरसेगा और एयरफोर्स के 277 अत्याधुनिक हथियार देखने को मिलेंगे। ———————————————- राजस्थान में सेना के युद्धाभ्यास से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर पर गरजे वज्र-भीष्म, धरती कांपी:पलभर में उड़ाए दुश्मन के ठिकाने, रेगिस्तान में ‘बैटल एक्स’ का युद्धाभ्यास राजस्थान में ऑपरेशन सिंदूर की तर्ज पर होगी बमबारी:बॉर्डर इलाकों में पहली बार आसमान में बाज की तरह हमला करने वाला एयरक्राफ्ट दिखेगा बॉर्डर-एरिया में सेना ने दुश्मन के ठिकानों पर दागी मिसाइलें:अपाचे और रुद्र हेलीकॉप्टर ने सटीक वार किए; पोकरण में ‘रुद्र शक्ति’ अभ्यास भारत-पाक बॉर्डर पर सेना ने युद्धाभ्यास में दिखाई ताकत:ड्रोन, AI और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का किया इस्तेमाल; सटीक निशाने से उड़ाए टारगेट जैसलमेर-बॉर्डर पर सेना ने दुश्मन के ठिकानों पर मचाई तबाही:हेलिकॉप्टर से उतरे जवान,एआई से टारगेट पर हमला; तीनों सेनाओं का ‘ऑपरेशन त्रिशूल’

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