राजस्थान के लोगों के दिल में 60 फीसदी तक ब्लॉकेज:रिपोर्ट में खुलासा- बिना वॉर्निंग के आ रहा हार्टअटैक, जानें- किन्हें सबसे ज्यादा खतरा

राजस्थान के सबसे बड़े हॉस्पिटल सवाई मानसिंह (SMS) में ‘दिल की धड़कन’ बढ़ाने वाली एक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक 16 फीसदी लोगों की नसों (आर्टरी) में ब्लॉकेज का लेवल 60 फीसदी या उससे ऊपर मिला है। डॉक्टर इसे गंभीर श्रेणी में मानते हैं। ये रिपोर्ट 1 जनवरी 2024 से 31 अक्टूबर 2024 तक एसएमएस अस्पताल में एंजियोग्राफी कराने आए मरीजों की जांच में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक 1901 लोगों की हुई इस रैंडम जांच में करीब 37 फीसदी ऐसे लोग मिले, जिनकी नसों में 25 से लेकर 50 फीसदी तक का ब्लॉकेज मिला। इसी तरह 17 फीसदी के करीब ऐसे लोग मिले, जिनके ब्लॉक का प्रतिशत 50 फीसदी से ऊपर निकला। डॉक्टर ने बताया अधिकांश मामलों में मरीजों में वॉर्निंग साइन भी नहीं आ रहे। यानी बिना लक्षण सामने आए ही लोग हार्ट की गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। पढ़िए-पूरी रिपोर्ट… 45 साल से कम उम्र के 28 फीसदी में लोगों की सिंगल आर्टरी में ब्लॉकेज
दरअसल, एसएमएस अस्पताल ने कम उम्र के लोगों में बढ़ते हार्ट अटैक के कारणों की 1901 मरीजों पर स्टडी की थी। इसके लिए अस्पताल ने 45 से कम और 45 से 70 की उम्र वाले मरीजों की एंजियोग्राफी रिपोर्ट का एनालिसिस किया। 45 साल से कम उम्र के मरीजों की जांच रिपोर्ट में 28 फीसदी ऐसे महिला-पुरूष मिले, जिनकी एक आर्टरी (धमनी- हार्ट से ऑक्सीजन युक्त ब्लड को शरीर में पहुंचाने का काम करती है) में 25 से लेकर 50 फीसदी तक का ब्लॉकेज मिला। कितने फीसदी ब्लॉकेज होते हैं खतरनाक
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और सीनियर प्रोफेसर कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि धमनियों में ब्लॉक होने सीधा सा मतलब है रक्त का प्रवाह बाधित होना और उसका हार्ट पर असर पड़ना। जैसे-पाइप में ब्लॉक होने से पानी की सप्लाई भी ब्लॉक हो जाती है, वो आगे नहीं बढ़ पाता। ठीक उसी तरह धमनियां हार्ट से ऑक्सीजन युक्त ब्लड की सप्लाई करती हैं। आर्टरी (धमनियों) में 50 से 70% के बीच ब्लॉकेज वाले मरीजों के लिए यह अलार्म स्टेज मानी जाती है। जबकि 70% से ज्यादा ब्लॉकेज के मरीज गंभीर श्रेणी में माने जाते हैं। हालांकि जो मरीज 40 से 70 के बीज ब्लॉकेज वाले होते हैं, वे समय पर ट्रीटमेंट नहीं करवाएं तो उन्हें गंभीर श्रेणी में आने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। पहले नहीं मिल रहे संकेत डॉक्टर दीपक माहेश्वरी ने बताया- आज कल हार्ट अटैक के अधिकांश केसों में वॉर्निंग साइनिंग नहीं आ रहे। मरीज को अचानक तेजी से दर्द होने के बाद हॉस्पिटल लाया जाता है। जांच में पता चलता है कि मरीज की आर्टरी में 90-95 फीसदी या उससे भी ज्यादा का ब्लॉकेज हैं। वहीं, कई केस में व्यक्ति के कार्डियक अरेस्ट भी हो जाता है, जिसमें जान चली जाती है। बीते कुछ दिनों में प्रदेशभर ऐसे तीन मामले भी सामने आए। 2 जनवरी 2025 को जोधपुर में मॉर्निंग वॉक करते समय सब इंस्पेक्टर (SI) करणी दान (39) को हार्ट अटैक आ गया था। वे अचेत होकर ट्रैक पर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें एम्स ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया। 24 दिसंबर को कोटा में एक केस ऐसा सामने आया था, जहां महिला (56) को पति की रिटायरमेंट पार्टी में कुर्सी पर बैठे-बैठे ही कार्डियक अरेस्ट आया था। उनकी मौत हो गई थी। इसके एक दिन बाद ही जयपुर में एक क्रिकेट ग्राउंड में खेलते वक्त पूर्व रणजी खिलाड़ी यश गौड़ (39) की भी कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी। 40 की उम्र के बाद रूटीन जांच करवाते रहना चाहिए
डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया- सर्दियों में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के केस ज्यादा आते हैं। इसके पीछे कारण प्लेटलेट्स की एक्टिविटी बढ़ने के साथ ही डिहाइड्रेशन होना। शरीर की मुख्य धमनियों का सिकुड़ना है। इस तरह के केस आने का खतरा सबसे ज्यादा हाई रिस्क ग्रुप के लोगों में रहता है। हाईरिस्क की श्रेणी में ऐसे व्यक्ति आते हैं, जिनको शुगर और बीपी की लम्बे समय से बीमारी है। फैमिली हिस्ट्री (हार्ट अटैक की) है। ऐसे लोगों को अपना रूटीन चैकअप करवाते रहना चाहिए। कम से कम दो साल में डॉक्टर को दिखाने के बाद जांच करवानी ही चाहिए। इसी तरह जो लोग हाई रिस्क ग्रुप में नहीं आते उनको भी 35-40 की उम्र के बाद 3 से 5 साल के गैप में डॉक्टर को दिखाकर एक रूटीन चैकअप करवाते रहना चाहिए। ​​​​​​धमनियों में कोलेस्ट्राल के कारण रुकावट, एंजियोग्राफी से लगता है पता
30 साल से अधिक की उम्र के लोगों में दिल की धमनियों में कोलेस्ट्राल बढ़ने से रुकावट आने लगती है। इसके कारण हार्ट अटैक की तकलीफ होती है। चलने में सीने में दर्द की शिकायत आती है। इसके इलाज में पहले दवाइयां देकर आराम देने की कोशिश की जाती है। तकलीफ बने रहने पर एंजियोग्राफी कर दिल की धमनियों की रूकावट (ब्लॉकेज) की जांच की जाती है। जिससे कितना ब्लॉकेज है, यह पता किया जाता है। इसके बाद ब्लॉकेज को खोलने के लिए एंजियोप्लास्टी यानी स्टैंड डाल कर ब्लॉकेज को खोला जाता है। धमनियों में ज्यादा ब्लॉकेज होने पर बाईपास सर्जरी की सलाह दी जाती है। ………. कम उम्र में हार्ट अटैक से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… मॉर्निंग वॉक करते-करते एसआई को आया अटैक:ट्रैक पर ही गिर पड़े, शव देखकर मां-पत्नी बेसुध हुई; साल 2014 में पुलिस में भर्ती हुए थे जोधपुर में मॉर्निंग वॉक करते समय सब इंस्पेक्टर (SI) करणी दान (39) को हार्ट अटैक आ गया। वे अचेत होकर ट्रैक पर गिर पड़े। लोग उनको एम्स ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। करणी दान साल 2014 में सब इंस्पेक्टर के पद पर पुलिस में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वे जोधपुर ग्रामीण की डीएसटी टीम के प्रभारी थे। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

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