राजस्थान के लाखों परिवारों का खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़ने का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। बीते सप्ताह हुई कैबिनेट की बैठक में लिए निर्णय के अनुसार, राज्य सरकार ने बंद पड़े खाद्य सुरक्षा योजना का पोर्टल फिर से खोलने की तैयारी कर ली है। योजना का पोर्टल बंद होने से लाखों परिवार आवेदन करने से वंचित रह गए थे। करीब 10 लाख आवेदन पहले से लंबित पड़े हैं। इसके अलावा 50 लाख से ज्यादा परिवारों ने अभी ई-केवाईसी भी नहीं करवाई है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा योजना को लेकर कई सवाल हैं। यह पोर्टल कब शुरू होगा? पहले आवेदन कर चुके लोगों को क्या फिर से फॉर्म भरना होगा? ई-केवाईसी नहीं करवाने वाले परिवारों का क्या होगा? आदि… ऐसे ही सवालों के जवाब भास्कर टीम ने प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा व विभाग के अधिकारियों से लिए। पढ़िए- मंडे स्पेशल स्टोरी…. भास्कर : सरकार के फैसले के बाद राजस्थान में अब खाद्य सुरक्षा योजना का पोर्टल दोबारा कब स्टार्ट होगा?
सुमित गोदारा : प्रदेश सरकार ने हाल ही में हुई कैबिनेट मीटिंग में राजस्थान में बंद पड़े खाद्य सुरक्षा योजना के पोर्टल को स्टार्ट करने का निर्णय लिया है। ऐसे में तय है कि इसी माह संभावित आगामी विधानसभा सत्र से पहले ही सरकार इस निर्णय को अमलीजामा पहनाने वाली है। विभागीय अधिकारी इसे लेकर अपनी तैयारियां भी पूरी कर चुके हैं। अब सरकार के निर्देशों का इंतजार है। सरकार की मंशा है कि जनवरी महीने के दूसरे सप्ताह के अंत में या तीसरे सप्ताह की शुरुआत में (संभवत: 10 से 12 जनवरी के बीच) इस पोर्टल को दोबारा से स्टार्ट कर दिया जाएगा। इसके बाद योजना के तहत पात्र लोग इसका फायदा ले सकेंगे। भास्कर : राजस्थान में पहले से ही लाभान्वित परिवारों का कोटा पूरा हो चुका है, नए परिवारों को कैसे मौका देंगे?
सुमित गोदारा : वर्तमान में खाद्य सुरक्षा योजना में हमारा 31 जनवरी तक गिवअप अभियान चल रहा है। इस अभियान में रोजाना 25 से 30 हजार लोग राष्ट्र धर्म निभाते हुए इस योजना को अपनी मर्जी से छोड़ रहे हैं। एक नवंबर 2024 से अब तक ऐसे लोगों की संख्या 7 लाख से ज्यादा हो गई है। इस योजना के तहत जनसंख्या के तय अनुपात के हिसाब से राजस्थान में 4 करोड़ 46 लाख लोगों के ही नाम जोड़े जा सकते हैं। वर्तमान में राजस्थान में करीब 4 करोड़ 36 लाख लोग इस योजना का लाभ पहले से ही ले रहे हैं। मौजूदा समय में हमारे पास 10 लाख लोगों को योजना में लाभ देने के लिए कोटा अभी बचा हुआ है। उम्मीद है कि गिवअप अभियान में मिल रहे लोगों के सहयोग से 4-5 लाख लोगों के लिए और स्पेस मिल सकेगा। भास्कर : योजना में पहले से जुड़े जिन परिवारों ने ई केवाईसी नहीं करवाई है, क्या उन्हें योजना से बाहर कर दिया जाएगा?
सुमित गोदारा : प्रदेश में पहले से खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ उठा रहे लोगों में से अब तक तक 50 लाख लोगों ने ई केवाईसी नहीं करवाई है। फिलहाल इन्हें योजना से हटाया नहीं गया है, लेकिन इनका खाता सस्पेंड कर दिया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों पर इन सभी को एक मौका और देते हुए 31 मार्च तक ई-केवाईसी करवाने का समय दिया गया है। अगर इसके बाद भी ये लोग अपनी ई-केवाईसी नहीं करवाते हैं तो उनका नाम हटाया जाएगा। यदि वो इस बीच अपनी ई-केवाईसी करवा लेते हैं तो दोबारा से योजना का लाभ स्टार्ट कर दिया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि 31 मार्च के बाद हमें एक बार फिर इस योजना में 30-35 लाख से ज्यादा नए लोगों को जोड़ने का स्पेस मिल सकेगा। अब खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े सवालों के जवाब… सवाल : पोर्टल खुलने पर क्या मेरे परिवार का नाम खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़ सकेगा? इसके लिए क्या पात्रता रहने वाली है?
जवाब : राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना में लाभ देने के लिए साल 2018 में पात्रता के लिए मापदंड निर्धारित किए थे। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस बार भी पात्रता के लिए मापदंड वही रहने वाले है। मंत्री सुमित गोदारा ने भी पूर्ववर्ती मापदंड अपनाने के संकेत दिए हैं। साल 2018 के आदेश के तहत खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए राजस्थान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए अलग-अलग मापदंड निर्धारित किए थे, जो इस प्रकार हैं – सवाल : अगर मैंने खाद्य सुरक्षा योजना में पोर्टल बंद होने से पहले आवेदन कर रखा है तो क्या अब पोर्टल शुरू होने पर नए सिरे से आवेदन करना होगा?
जवाब : नहीं, जिन लोगों ने पहले से ही आवेदन कर रखे हैं, सरकार उन्हें लंबित मानते हुए, पहले उनकी पात्रता जांचेगी। मंत्री सुमित गोदारा के अनुसार, पहले आवेदन कर चुके लोगों को नया आवेदन करने की जरूरत नहीं है। अगर वे पात्र होंगे तो उसी आवेदन के अनुसार नाम जुड़ेगा। सवाल : खाद्य सुरक्षा योजना में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कहां और कैसे होगा?
जवाब : अगर आप ग्रामीण क्षेत्र से हैं तो सबसे पहले योजना से जुड़ा ऑफलाइन आवेदन भरना होगा। ये फॉर्म राशन डीलर व किसी भी ईमित्र से खरीद सकते हैं। विभागीय वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं। इस पर सरपंच, पटवारी और ग्रामसेवक से दस्तखत करवाने होंगे। फॉर्म भरने के बाद आवश्यक दस्तावेज लगाकर लेकर ई-मित्र संचालक से ऑनलाइन अपलोड करवाना होगा। इसके बाद एसडीएम उस आवेदन को वेरिफिकेशन के लिए ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ (पंचायत समिति विकास अधिकारी) और शहरी क्षेत्र में नगरीय निकाय के अधिकारी को भेजेगा। मंत्री सुमित गोदारा के अनुसार, पहले एसडीएम, बीडीओ व निकाय लेवल पर बिना किसी प्रॉपर जांच के ही ऑनलाइन वेरिफिकेशन हो रहे थे। लेकिन अब फॉर्म के वेरिफिकेशन के लिए ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ के अंडर में एक पंचायत लेवल स्क्रूटनी कमेटी उसे जांचेगी। इस कमेटी में ग्राम सेवक, पटवारी और बीएलओ पात्रता की जांच रिपोर्ट बीडीओ को देंगे। इसके बाद ही आवेदन वेरीफाई माना जाएगा। शहर में निकाय लेवल पर एक स्क्रूटनी कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। अब उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) ही इस पर अंतिम निर्णय लेगा। मंत्री गोदारा ने बताया कि इसके अलावा अब हर साल योजना में जोड़े गए नए नामों में से 2 प्रतिशत की रेंडमली जांच की जाएगी। इसे सख्ती से अमल में लाया जाएगा। जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी अपात्र को जोड़ने का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सवाल : सक्षम और अपात्र होते हुए भी खाद्य सुरक्षा योजना से अपना नाम नहीं हटवाया है तो क्या होगा? क्या सरकार कार्रवाई करेगी?
जवाब : ऐसे लोगों पर कार्रवाई के साथ-साथ उनसे भारी रिकवरी की जाएगी। 27 रुपए किलो के हिसाब से उनके द्वारा उठाए गए गेहूं की कीमत वसूली की जाएगी। ऐसे लोगों की सूचना विभाग को मिले, इसके लिए राशन की शॉप पर नंबर भी दिए जाएंगे। सवाल : खाद्य सुरक्षा योजना में पहले से चयनित परिवार में कोई नया सदस्य जुड़ता है तो क्या उसे भी योजना का लाभ मिल सकेगा?
जवाब : पात्रता रखने वाले परिवार में जुड़ी शादीशुदा महिलाएं, विशेष योग्यजन और अवयस्क बच्चों को जोड़ने को लेकर पहले से प्रावधान हैं। पूर्व में हमने जो 13 लाख नए लोग इस योजना में जोड़े थे, उनमें सबसे ज्यादा इन्हीं श्रेणियों की पात्रता रखने वाले थे। खाद्य सुरक्षा योजना क्या है?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 राज्य में 2 अक्टूबर, 2013 से प्रारंभ की गई थी। इस योजना के तहत राज्य में वर्तमान में अंत्योदय परिवारों को 35 किलोग्राम प्रति परिवार एवं अन्य पात्र लाभार्थियों को 5 किलोग्राम प्रति यूनिट प्रति माह गेहूं उपलब्ध कराया जाता है। राजस्थान में योजना के तहत अन्त्योदय, बी.पी.एल., स्टेट बी.पी.एल. राशन कार्ड धारकों को और अन्य पात्र परिवारों को भी निशुल्क प्रतिमाह खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। 13 वर्ष पुरानी जनगणना के हिसाब से ही मिल रहा कोटा
प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के लाभार्थियों की सीमा वर्ष-2011 की जनगणना के आधार पर निर्धारित की हुई है। एनएफएसए के अनुसार, कुल जनसंख्या का 69 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र और 53 प्रतिशत शहरी क्षेत्र के लोग ही इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह कोटा 13 वर्ष बाद भी 2011 की जनसंख्या के अनुपात में है। वर्ष-2011 में प्रदेश की जनसंख्या 6 करोड़ 86 लाख 21 हजार थी, जबकि वर्तमान में जन आधार कार्ड सांख्यिकी के अनुसार, के प्रदेश में 7 करोड़ 88 लाख से ज्यादा की जनसंख्या है। राज्य में फिलहाल खाद्य सुरक्षा के तहत भारत सरकार द्वारा-2011 की जनगणना के आधार पर 4 करोड़ 46 लाख व्यक्तियों की सीमा निर्धारित की गई है। पिछले 13 वर्षों में कई नए परिवार खाद्य सुरक्षा योजना की पात्रता के दायरे में आ गए हैं। ऐसे जरूरतमंद परिवारों की खाद्य सुरक्षा के लिए वर्तमान अनुमानित जनसंख्या के अनुसार नए सिरे से खाद्य सुरक्षा की सीलिंग का पुनर्निर्धारण होना जरूरी है।


