राजस्थान में इसी जून में राज्यसभा की 3 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें कांग्रेस की 1 और बीजेपी की 2 सीटें शामिल हैं। कांग्रेस की सीट ‘हॉट सीट’ बनी हुई है। इस सीट पर राष्ट्रीय कांग्रेस के एक बड़े नेता ने लॉबिंग भी शुरू कर दी है। ये नेता पिछली बार उम्मीदवार न बनाए जाने को लेकर पार्टी से नाराजगी भी जता चुके हैं। वहीं, पार्टी राजस्थान से भी एक बड़े नाम पर विचार कर रही है। इधर, बीजेपी में 1 सीट पर नेता रिपीट करने की तैयारी की जा रही है। मतलब, ये सीट राजस्थान से बाहर के नेता के पास ही रहेगी। वहीं, एक सीट पर प्रदेश के 2 बड़े नेताओं के नामों के बीच ‘टक्कर’ फिर चर्चा में है। भाजपा-कांग्रेस ने इन सीटों पर जातीय, क्षेत्रीय और राजनीतिक जरूरतों के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के नामों पर मंथन शुरू कर दिया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… बीजेपी के राज्यसभा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू व राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल जून में पूरा होने वाला है। बीजेपी के रवनीत सिंह राजस्थान से बाहर के हैं। वे मोदी सरकार में रेलवे मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। कांग्रेस के नीरज डांगी और बीजेपी के राजेंद्र गहलोत 6 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। दोनों ने जून 2020 में राज्यसभा चुनाव जीता था। वहीं रवनीत सिंह राजस्थान से अगस्त, 2024 में राज्यसभा सांसद चुने गए थे। कार्यकाल जून, 2026 तक ही होने के कारण वे लगभग दो साल ही इस सीट पर रह सके। दरअसल, अगस्त, 2024 में राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री वेणुगोपाल केरल के अलाप्पुझा से लोकसभा सांसद चुने गए थे। इससे बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। बीजेपी के विधायकों का संख्यबल ज्यादा था। बीजेपी ने रवनीत सिंह को उम्मीदवार बनाया और वे जीत गए। कांग्रेस ने इस चुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था। राष्ट्रीय कांग्रेस के बड़े नेता पवन खेड़ा राजस्थान की राज्यसभा सीट की उम्मीदवारी जताने के लिए सक्रिय हो गए हैं। लॉबिंग भी शुरू कर दी है। सीट की दावेदारी के लिए राजस्थान कनेक्शन को भी भुनाने का प्रयास कर रहे हैं। पवन खेड़ा का जन्म उदयपुर में हुआ था। हालांकि, पवन खेड़ा की शिक्षा और राजनीति दिल्ली से ही ज्यादा जुड़ी रही है। राजस्थान की राजनीति में वे कभी सक्रिय दिखाई नहीं दिए। करीब 7 वर्ष पहले उनके पिता एचएल खेड़ा का देहांत हो गया था। उदयपुर में उनका अंतिम संस्कार हुआ था। सूत्रों के अनुसार खेड़ा का एक और तर्क है कि वे मेवाड़ से ताल्लुक रखने के कारण कांग्रेस का उस क्षेत्र से प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इस क्षेत्र में बीजेपी मजबूत है। पिछली बार नाराज होकर किया था ट्वीट जुलाई, 2022 में देश के अलग-अलग राज्यों से 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुआ था। इनमें राजस्थान की 4 सीटें भी शामिल थीं। पवन खेड़ा को उम्मीद थी कि उन्हें मौका दिया जाएगा। कांग्रेस ने 29 मई को सभी 10 सीटों के उम्मीदवारों के नामों की सूची जारी की, जिसमें पवन खेड़ा का नाम नहीं था। उन्होंने सूची जारी होने के बाद ट्वीट भी किया था। इसके बाद कांग्रेस ने उनको मीडिया और पब्लिसिटी सेल का चेयरमैन बनाया। उस समय राजस्थान में 4 में 3 सीटों पर कांग्रेस ने रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद कुमार तिवाड़ी को मौका दिया और वे सभी जीते। एक सीट पर बीजेपी ने घनश्याम तिवाड़ी को उम्मीदवार बनाया था। वे भी जीत गए। राज्यसभा सीट के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार डॉ. जोशी के नाम पर गंभीरता से विचार चल रहा है। डॉ. जोशी राजस्थान में कांग्रेस के बड़े नेताओं में शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधायक, सांसद और प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी में बड़े पदों पर रहने के कारण उनके पास अच्छा खासा राजनीतिक अनुभव भी है। डॉ. जोशी मेवाड़ में भी कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं। अक्सर चुनावों में मेवाड़ में कांग्रेस की स्थिति कमजोर बनी रहती है। पार्टी का मानना है कि ऐसे में स्थानीय चेहरे को बड़ा मंच मिलेगा, तो वहां की क्षेत्रीय संवेदनाओं के साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं-समर्थकों में भी उत्साह बढ़ेगा। बीजेपी करेगी रवनीत को रिपीट बीजेपी सूत्रों के अनुसार पार्टी अपनी एक सीट पर रवनीत सिंह बिट्टू को रिपीट करने का मन बना चुकी है। इसके दो मजबूत कारण भी हैं। एक तो बीजेपी की पंजाब पर पकड़ कमजोर है। इस कारण क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों में रवनीत सिंह का चेहरा फिट बैठता है। वे मोदी सरकार में प्रमुख सिख चेहरा हैं। दूसरा, हाल ही लोकसभा परिसर में राहुल गांधी ने रवनीत को गद्दार दोस्त कहकर पुकारा। बीजेपी ने इसे सिख राजनीति से भी जोड़ा। सिखों का अपमान बताया। 2024 में बीजेपी में शामिल हुए : रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं। मार्च, 2024 में रवनीत सिंह बीजेपी में शामिल हुए। बीजेपी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में लुधियाना से टिकट दिया, लेकिन वह कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा बरार से हार गए थे। रवनीत सिंह को 6 महीने के अंदर किसी सदन का सदस्य होना जरूरी था। ऐसे में 2024 में बीजेपी ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा था। दूसरी सीट पर दो बड़े दावेदार राजेंद्र राठौड़ और सतीश पूनिया राजस्थान में पिछले विधानसभा चुनाव में राजेंद्र राठौड़ का हारना काफी चर्चा में रहा। राजेंद्र राठौड़ के समर्थक उनके लिए सत्ता या संगठन में किसी बड़े पद की उम्मीद लगाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार राठौड़ भी खुद की उम्मीदवारी की आशा में बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं के संपर्क में हैं। वे 7 बार लगातार विधायक, केबिनेट मंत्री रहे हैं। वहीं, सदन में हमेशा तैयारी के साथ आना और प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखना उनकी दावेदारी को मजबूत करता है। बीजेपी सूत्रों के अनुसार सतीश पूनिया को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पूनिया की संघ-संगठन और कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। हरियाणा में बीजेपी के संगठन प्रभारी रहते वहां के विधानसभा चुनाव का जिम्मा संभाला और वहां पार्टी की सरकार बनी। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद और बीजेपी सरकार बनने के बाद पार्टी ने उन्हें राजस्थान से बाहर ही राजनीतिक कार्यों में व्यस्त रखा। उनके समर्थकों का मानना है कि यदि राज्यसभा के लिए राजस्थान से उन्हें मौका मिलता है तो यहां की बीजेपी की राजनीति में बेहतर मैसेज जाएगा।


