कोटा में आज गांव ग्वाल योजना की शुरूआत की गई। चेचट तहसील के खेड़ली गांव से श्री राम स्नेही संप्रदाय शाहपुरा पीठ के जगतगुरु स्वामी रामदयाल महाराज और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर की मौजूदगी में इस योजना की शुरूआत की गई। योजना के तहत हर चयनित गांव में एक गांव ग्वाला (गाय चराने वाला) नियुक्त किया जाएगा, जिसे हर महीने सैलरी भी दी जाएगी। यह ग्वाला गांव के सभी गोवंश को एक साथ गोचर भूमि तक चराने ले जाएगा। शाम को वापस गांव में लाकर उनके मालिकों तक पहुंचाएगा। अभी कोटा के रामगंजमंडी क्षेत्र में 14 गांव ग्वाले तैयार किए गए हैं। रविवार को करीब 10 बजे हुए कार्यक्रम में मंत्री मदन दिलावर ने मंच पर 14 गांव ग्वालों का माला और साफा पहनाकर स्वागत किया। मंत्री मदन दिलावर ने बताया- योजना का उद्देश्य गोपालन को संगठित स्वरूप देना, गोचर भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और ग्रामीण रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है। दिलावर ने कहा- आज के समय चारागाह की जमीनों पर अतिक्रमण हो चुके हैं। लोग अपने गोवंश को चारागाह भूमि पर चराने के लिए नहीं लेकर जाते हैं। ऐसे में लोगों ने इन जमीनों पर कब्जा कर लिया है। विशेषज्ञों और अनुभवी गोवंश पालकों से चर्चा कर प्राचीन परंपरा गांव ग्वाल को फिर से शुरू किया जा रहा है। लोग गोवंश को खुला छोड़ देते, इससे हादसे होते आजादी से पहले तक पूरे भारत के ग्रामीण अंचल में यह परंपरा प्रचलन में थी। गांव के सभी गोवंश को गांव का ही व्यक्ति एक साथ ले जाता था। दिन भर गायों को चरा कर शाम में वापस गांव ले आता था। इस काम के बदले गौपालक उस गाय चराने ले जाने वाले को गेहूं दिया करते थे। ग्रामीण अंचलों में यह व्यवस्था समाप्त हो गई। अब लोग गोवंश को खुला छोड़ देते हैं। इससे सड़कों पर हादसे भी होते है। इस योजना में प्रत्येक गांव में एक व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा, जो प्रतिदिन सुबह गांव की सभी गायों को चराने के लिए चारागाह भूमि पर लेकर जाएगा। क्या है गांव ग्वाला योजना गांव ग्वाल योजना के तहत जिस ग्वाल बनाया जाएगा। वो हर रोज चिन्हित गांव से गोवंश को इकट्ठा कर गौचर जमीन पर लेकर जाएगा। गोवंश को चराया जाएगा। शाम को वापस सभी गोवंश को इकट्ठा कर गांव में लेकर आएगा। हर गांव ग्वाल को दस हजार रुपए हर महीना दिए जाएंगे। ये पैसा गांव के लोग ही इकठ्ठा कर गोवंश की सेवा के बदले देंगे। अभी कोटा के रामगंजमंडी में 14 गांव ग्वाल तैयार किए है। गांवों को चिन्हित कर गांव ग्वाल तैनात किए जाएंगे। ऐसे काम करेगी योजना योजना में सरकार या किसी विभाग का डायरेक्ट कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा। पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के नेतृत्व में इस योजन को गोवंश प्रेमी शुरू कर रहे हैं। मदन दिलावर ने बताया कि योजना पूरे राजस्थान में शुरू की जाएगी, लेकिन अभी कोटा से इसकी शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत गांव के ही बेरोजगार व्यक्ति को नियुक्त किया जाएगा। गांव वाले ही गांव ग्वाल चुनेंगे। गांव में समिति बनाई जाएगी गांव में समिति बनाई जाएगी। इस समिति में गांव के भामाशाह, वार्ड पंच, सरपंच और गांव के लोग होंगे। इनके जरिए ही गांव ग्वाले पर निगरानी रखी जाएगी। समिति के जरिए ही जनसहयोग से गांव वाले ही पैसे देंगे। जो गांव ग्वाल बनेगा, वो ऐसा व्यक्ति होगा जो किसी तरह का नशा न करता हो। इस योजना का मकसद है कि गोवंश को सड़क पर खुले में न छोड़ा जाए। गोचर भूमि को बचाया जाए। इसके लिए ये योजना शुरू की गई है। गाय पॉलीथिन या प्लास्टिक नहीं खाएगी। गोचर भूमि पर गोवंश की आवाजाही होने से वहां कब्जे नहीं होंगे। बेरोजगार को छोटा मोटा काम मिल जाएगा। ये भी पढ़ें… बकरियां ले जा रहे दोस्त से मिलकर भावुक हुए मंत्री:साथ में सब्जी बेची थी; दिलावर बोले- राजस्थान में ग्वालों को मिलेंगे 10 हजार रुपए महीने शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा- गांवों में गायों की देखरेख के लिए ग्वाल की व्यवस्था की जाएगी, जिसको 10 हजार रुपए प्रति महीने दिए जाएंगे। साथ ही चारागाह भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर गायों के लिए पर्याप्त गोचर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। दिलावर ने सोमवार को बारां जिले के कोयला गांव में इसकी घोषणा की। (पूरी खबर पढ़ें)


