राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पंचायत चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब ऐसा होना मुश्किल लग रहा है। इसकी वजह है अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट में देरी। दरअसल, हाल ही में आयोग ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि- जनाधिकार प्राधिकरण द्वारा पिछड़े वर्ग की जनसंख्या के संबंध में उपलब्ध कराए गए नंबर अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण हैं। इनके आधार पर पंचायतों के वार्ड पंच के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग की सीटों का आरक्षण निर्धारित किया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देश जारी किए जाए कि सही सूचना और डेटा आयोग को भिजवाएं। आयोग का यह भी कहना है कि पंचायतवार एससी/ एसटी के आरक्षण से संबंधित सूचना भी सही नहीं है। साथ में पंचायतवार जनसंख्या के स्पष्ट एवं पूर्ण आंकड़े तथा एससी, एसटी के आरक्षण के संबंध में वांछित सूचना प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आयोग को अभी तक सही सूचना नहीं मिल पाई है तो वह 31 मार्च तक सरकार को रिपोर्ट कैसे सौंप पाएगा? क्या आयोग समय की कमी का हवाला देकर सरकार से एक बार फिर कार्यकाल बढ़ाने की मांग करेगा? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) ने पत्र में ये लिखा 403 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या एवं अन्य पिछ़़ड़ा वर्ग की जनसंख्या शून्य दर्शाई गई है। 118 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या 1 से 500 तक दर्शाई है। 266 पंचायतों में कुल जनसंख्या 501 से 1000 तक दर्शाई गई है। जबकि पंचायतीराज विभाग के निर्देशों के अनुसार पंचायतों का गठन 1200 से अधिक की जनसंख्या पर किया गया है। इससे स्पष्ट है कि जनसंख्या के संबंध में उपलब्ध कराए गए आंकड़े अपूर्ण एवं त्रूटिपूर्ण हैं। इन आंकड़ों के आधार पर पंचायतों के वार्ड पंच के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग की सीटों का आरक्षण निर्धारित किया जाना संभव नहीं है। त्रुटियों का जनाधार प्राधिकण से निराकरण करवाया जाए। समस्त पंचायतों (14 हजार 403) के संबंध में पंचायतवार कुल जनसंख्या एंव पिछ़ड़ा वर्ग की जनसंख्या से संबंधित आंकड़े उपलब्ध करवाने के निर्देश जनाधार प्राधिकरण/ पंचायतीराज विभाग को दिए जाएं। ओबीसी आयोग को नहीं दी गई आरक्षण के संबंध में सूचना मुख्य सचिव को लिखे पत्र में आयोग ने कहा है कि ऐसी परिस्थितियों के कारण पंचायतों में वार्ड पंच के पदों में अन्य पिछ़़डा वर्ग का आरक्षण निर्धारित किया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। पंचायतीराज विभाग को जानकारी देने के बाद भी 24 फरवरी 2026 तक आयोग को पंचायतवार जनसंख्या के स्पष्ट एवं पूर्ण आंकड़े तथा एससी, एसटी के आरक्षण के संबंध में वांछित सूचना प्राप्त नहीं हुई है। इस स्थिति को आयोग द्वारा शासन सचिव, पंचायतीराज विभाग जयपुर के ध्यान में लाया जा चुका है। किंतु 24 फरवरी 2026 तक आयोग को पंचायतवार जनसंख्या के स्पष्ट एवं पूर्ण आंकड़े तथा एससी, एसटी के आरक्षण के संबंध में वांछित सूचना प्राप्त नहीं हुई है। हाईकोर्ट ने दिए थे 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर को करीब 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि इससे पहले सरकार 31 दिसंबर तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करें। वहीं, एक बार परिसीमन का काम पूरा होने के बाद उसके फाइनल नोटिफिकेशन को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। पंचायतीराज राज्यमंत्री ओटाराम देवासी का कहना है- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर हम सब बैठकर आने वाले समय में जो कोर्ट का निर्णय है, उसके अनुरुप ही चुनाव कराने जा रहे हैं। नई पंचायतें और पंचायत समितियां गठित की हैं, उसके आधार पर चुनाव कराएं जाएंगे। हालांकि, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर उन्होंने कुछ बोलने से इनकार कर दिया। वहीं, ओबीसी आयोग के अध्यक्ष मदन लाल भाटी से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ओबीसी आयोग पहले भी समय पर नहीं दे पाया रिपोर्ट राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने 9 मई 2025 को राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के गठन के आदेश जारी किए थे। सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदन भाटी को अध्यक्ष बनाया गया था। वहीं, 4 अन्य लोगों मोहन मोरवाल, डॉ राजीव सक्सेना, एडवोकेट गोपाल कृष्णा और पवन मंडाविया को सदस्य मनोनीत किया था। सरकार 3 बार आयोग का कार्यकाल बढ़ा चुकी है, क्योंकि आयोग तय समय में रिपोर्ट नहीं दे पाया था। राज्य सरकार ने पहले 31 दिसंबर तक कार्यकाल बढ़ाया था। इसके बाद 31 मार्च तक बढ़ा दिया। सरकार के पास वापस कोर्ट जाने के 4 विकल्प 1. एक्सपर्ट के मुताबिक- सरकार कोर्ट में तर्क दे सकती है कि ओबीसी वर्ग के आरक्षण का निर्धारण करने के लिए हमें समय चाहिए। 2. बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव के बाद अंतिम फैसला आता है तो आरक्षण नहीं मिल पाएगा। 3. कुछ और समय मिले, जिससे आरक्षित वर्ग के अधिकारों का हनन न हो। 4. थोड़ा समय मिले तो वन स्टेट वन इलेक्शन की बात भी पूरा कर लेंगे। 113 निकाय चुनाव स्थगित के लिए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी इससे पहले राजस्थान सरकार 113 नगर निकायों के चुनाव स्थगित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है। सरकार ने हाईकोर्ट की ओर से रद्द किए जाने के बाद वार्ड परिसीमन प्रक्रिया को दोबारा करने की आवश्यकता का हवाला देते हुए चुनाव स्थगित के लिए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है। एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में कहा गया है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 309 शहरी स्थानीय निकायों में से 113 के लिए किए गए वार्ड परिसीमन अभ्यास को रद्द कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप, राजस्थान सरकार ने चुनाव कराने से पहले इस प्रक्रिया को नए सिरे से पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। एसएलपी के अनुसार, सरकार की ओर से अधिक समय मांगने के कई कारण हैं। उच्च न्यायालय ने 113 शहरी निकायों में परिसीमन प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण पाया है। इन नगर निकायों में वार्डों की कुल संख्या अपरिवर्तित रही, जबकि उनकी आंतरिक सीमाओं में परिवर्तन किया गया। क्या ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव संभव है? ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना भी चुनाव संभव है? इस सवाब के जवाब में आयोग के एक पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा- अभी तो हम यही उम्मीद कर रहे हैं कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आ जाएगी। उसके बाद ज्यादा से ज्यादा 7 दिन लगेंगे सीटों को ओबीसी के हिसाब से आरक्षित करने में। अगर ये नहीं होता है जो सुप्रीम कोर्ट कहेगा उसके अनुसार काम होगा।


