राजस्थान में पंचायत-पंचायत समितियों और जिला परिषदों का पुनर्गठन होगा:एसआई भर्ती पर कैबिनेट में फैसला नहीं हुआ; सीईटी का स्कोर 3 साल मान्य होगा

भजनलाल सरकार ने गहलोत राज में बने 17 नए जिलों में से 9 जिलों और 3 संभागों (पाली,सीकर, बांसवाड़ा) को खत्म कर दिया है। शनिवार को कैबिनेट की बैठक में सरकार ने कई बड़े फैसले किए। बैठक में पंचायत, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का पुनर्गठन करने का निर्णय किया। साथ ही समान पात्रता परीक्षा (सीईटी) का स्कोर एक की जगह तीन साल तक मान्य रखने पर फैसला हुआ। खाद्य सुरक्षा योजना में नए लोग जोड़े जाएंगे, 3 महीने के लिए अभियान चला कर नए नाम जोड़े जाएंगे। सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती को लेकर बैठक में फैसला नहीं हुआ। कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा- एसआई भर्ती का प्रकरण आज के एजेंडे में नहीं था, मामला कोर्ट में लंबित है। कानून मंत्री बोले- 40 की जगह 25 ग्राम पंचायतों पर पंचायत समिति बनेगी
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बैठक के बाद कहा- हम ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद का पुनर्गठन करेंगे। सामान्य इलाकों में 2019 में कम से कम 4000 और अधिकतम 6500 जनसंख्या पर एक पंचायत बनती थी । इसमें अब हमने 4000 की जगह 3000 और 6500 की जगह 5500 कर दिया है। अब 3000 की आबादी पर एक पंचायत बनेगी। सामान्य जिलों के अलावा दूसरे जिले हैं, वहां न्यूनतम जनसंख्या 2000 कर दी है। कानून मंत्री ने कहा- एक पंचायत समिति में करीब 40 ग्राम पंचायत होती है, 40 पंचायत को मिलकर एक पंचायत समिति बनती है। अब 40 के स्थान पर 25 ग्राम पंचायत पर ही एक पंचायत समिति बन सकेगी। जिला परिषदों के पुनर्गठन में मापदंड वही रहेंगे। 20 दिन में पुनर्गठन के प्रस्ताव
जोगाराम पटेल ने कहा- -पंचायत पुनर्गठन के लिए हम 20 दिन के अंदर-अंदर प्रस्ताव मंगवाएंगे। कलेक्टर उसको एग्जामिन करेंगे और सरकार उनकी सुनवाई करेगी। 10 दिन में सुनवाई करने के बाद कमेटी उसका निर्णय करेगी यह हमारी प्रक्रिया रहेगी। प्रदेश में सरपंच और प्रधान ज्यादा होंगे
पंचायतों, पंचायत समितियों के पुनर्गठन करने से अब प्रदेश में ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों की संख्या बढ़ेगी। इससे सरपंच और प्रधानों की संख्या बढ़ेगी। पंचायत चुनावों में इस बार ज्यादा प्रधान और सरपंच बनेंगे। पंचायत पुनर्गठन से वन स्टेट-वल इलेक्शन के लिए समय मिलेगा
पंचायतों के पुनर्गठन से सरकार को वन स्टेट-वन इलेक्शन के लिए समय मिल जाएगा। 5 साल में चुनाव कराने के संवैधाानिक प्रावधान के चलते लंबे समय तक चुनाव आगे नहीं बढ़ सकते और सरकार लंबे समय तक चुनाव टालती है तो कोर्ट में रोक लग सकती है। लेकिन पंचायत पुनर्गठन सरकार के लिए चुनाव टालने का कानूनी हथियार बन जाएगा। सरकार कोर्ट में पंचायत पुनर्गठन का हवाला देकर चुनाव को कुछ समय आगे बढ़ा देगी। जनवरी में करीब 6789 पंचायतों के चुनाव बाकी हैं, सरकार इनके चुनाव आगे टालना चाहती है। अब पंचायतों, पंचायत समितियों, जिला परिषदों के पुनर्गठन का तर्क देकर चुनाव आगे खिसकाया जा सकेगा। वित्तीय संसाधन और जनसंख्या के पहलुओं को अनदेखा किया
जोगाराम पटेल ने कहा कि चुनाव से पहले नए जिले और संभाग बनाए गए थे। वह व्यवहारिक नहीं थे। वित्तीय संसाधन और जनसंख्या के पहलुओं को अनदेखा किया गया। अनेक जिले ऐसे थे, जिनमें 6-7 तहसीलें नहीं थी। इतने जिलों की आवश्यकता होती तो इसका परीक्षण किया जाता। जोगाराम ने कहा कि न तो इसके लिए कोई पद सृजित किए, न ही कोई कार्यालय भवन की व्यवस्था की गई। जितने जिले बने, उसमें 18 विभागों में पद सृजित की कोशिश की गई। ये जिले राजस्थान पर अनावश्यक भार डाल रहे हैं। रीव्यू के लिए बनी कमेटी ने पाया कि इन जिलों की उपयोगिता नहीं है। सरकार के निर्णय के बाद अब 9 जिलों में लगे कलेक्टर-SP और जिला स्तरीय अफसर हटेंगे, इन जिलों में बने हुए जिला स्तरीय पद भी खत्म हो जाएंगे। ये 3 संभाग खत्म: बांसवाड़ा, पाली, सीकर।
ये 9 जिले खत्म: अनूपगढ़, दूदू, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, केकड़ी, नीम का थाना, सांचौर और शाहपुरा।
ये जिले रहेंगे : बालोतरा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन, कोटपूतली-बहरोड, खैरथल-तिजारा, फलौदी और सलूंबर। 1 जनवरी से लग जाएगी जनगणना रजिस्ट्रार जनरल की रोक
सरकार को 31 दिसंबर तक नए जिलों से लेकर नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने की छूट थी। 31 दिसंबर के बाद जनगणना रजिस्ट्रार जनरल की तरफ से नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन पर रोक लग जाएगी। 1 जनवरी से प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं फ्रिज होने के कारण नई पंचायत, नए उपखंड, तहसील से लेकर नए जिले बनाने से लेकर उनकी सीमाओं में फेरबदल करने पर रोक लग जाएगी। ऐसे में सरकार को नए जिलों पर फैसला करने के लिए केवल 31 दिसंबर तक का वक्त था। सरकार ने उससे पहले ही नए जिलों पर निर्णय ले लिया। सीएम ने केंद्रीय गृहमंत्री को चिट्ठी लिखी थी
एक जुलाई से नए जिले बनाने और बाउंड्री में बदलाव पर जनगणना रजिस्ट्रार जनरल की रोक थी। सीएम भजनलाल शर्मा ने सितंबर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर नए जिले सहित नई प्रशासनिक यूनिट बनाने पर लगी रोक हटाने की मांग की थी। जनगणना रजिस्ट्रार जनरल ने 8 अक्टूबर को आदेश जारी कर देशभर के लिए 31 दिसंबर तक नई एडमि​निस्ट्रेटिव यूनिट बनाने पर लगी रोक हटा दी थी। … जिलों से जुड़ी ये खबरें भी पढे़ं…. गहलोत राज में बने 9 जिले, 3 संभाग खत्म:जयपुर ग्रामीण-जोधपुर ग्रामीण पुराने जिलों में मर्ज होंगे, अजमेर में शामिल होगा केकड़ी कांग्रेस सरकार के वक्त बने नए जिलों में से 9 जिलों और 3 संभागों को भजनलाल सरकार ने कैंसिल कर दिया है। साथ ही तीन संभागों को भी रद्द किया गया। दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़, सांचौर जिलों को निरस्त कर दिया गया है। (पूरी खबर पढ़ें) गहलोत बोले-डीग भरतपुर से 35 किलोमीटर,उसे खत्म क्यों नहीं किया?:डोटासरा ने कहा- सीएम ने अपना जिला बचा लिया, दूदू खत्म कर डिप्टी सीएम को निपटा दिया भजनलाल सरकार के कांग्रेस राज में बने 9 जिले और 3 संभाग खत्म के फैसले पर राजनीतिक वार शुरू हो गया है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया है। कांग्रेस ने इसके खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। पढ़ें पूरी खबर… गहलोत राज के छोटे जिले खत्म करने की तैयारी:एसआई भर्ती रद्द करने का भी हो सकता है निर्णय, कैबिनेट की बैठक में फैसला संभव सीएम भजनलाल शर्मा ने शनिवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। इसमें गहलोत राज में बनाए गए नए जिलों और सब इंस्पेक्टर( एसआई) भर्ती रद्द करने पर फैसला होने के आसार है। करीब छह से आठ जिलों को बड़े जिलों में मर्ज किया जा सकता है। मंत्री लेवल कमेटी का भी छोटे जिलों को समाप्त करके बड़े जिलों में मर्ज करने का मत है। (पूरी खबर पढ़ें)

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